
स्पिनिंग से जुड़े टेक्सटाइल स्टॉक्स जैसे कि केपीआर मिल (KPR Mill), अंबिका कॉटन मिल्स (Ambika Cotton Mills) , नितिन स्पिनर्स (Nitin Spinners) और ट्राइडेंट (Trident) इस हफ्ते अब तक 8% तक गिर चुके हैं। यह गिरावट तब आई जब अमेरिका ने बांग्लादेश के लिए टैरिफ की दरें घटाकर 19% कर दीं और यह भी सहूलिय दी कि अगर बांग्लादेश की टेक्सटाइल कंपनियां अमेरिकी कपास या मैनमेड फाइबर का इस्तेमाल करती हैं तो टैरिफ शून्य हो जाएगा। इससे घरेलू मार्केट में हाहाकार मच गया क्योंकि बांग्लादेश अभी भारत से बड़ी मात्रा में कपास और धागा (यार्न) आयात करता है लेकिन अब अमेरिकी राहत से आशंका है कि मीडियम टर्म में स्पिनिंग कंपनियों के एक्सपोर्ट वॉल्यूम और कमाई पर दबाव पड़ सकता है।
नियर टर्म में दबाव की क्यों कोई आशंका नहीं?
अमेरिका और बांग्लादेश की डील से भारतीय स्पिनिंग कंपनियों को मीडियम टर्म में झटका लगने की आशंका है लेकिन नियर टर्म में लॉजिस्टिकल और ऑपरेशनल दिक्कतों के चलते सीमित असर ही दिखने के आसार हैं। मार्केट एक्सपर्ट सुनीन सुब्रमण्यम का कहना है कि अमेरिकी कपास की खेप को चिटगांव पहुंचने में 40 दिन से अधिक लगते हैं, जबकि भारत से जमीनी रास्ते से यह सिर्फ 4–7 दिनों में पहुंच जाता है, जिससे सोर्सिंग में तेजी से बदलाव करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा बांग्लादेश का स्पिनिंग सेक्टर अभी इतना बड़ा नहीं है कि वह अमेरिकी कपास को घरेलू स्तर पर प्रोसेस कर सके। उसे अभी भी धागा बाहर से मंगाना पड़ता है, और इसके लिए भारत सबसे बेहतर लॉजिकल स्रोत बना हुआ है।
एमके ग्लोबल के को-फंड मैनेजर और रिसर्च हेड कश्यप जावेरी का भी ऐसा मानना है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की स्पिनिंग इंडस्ट्री अभी भी बिजली की अस्थिर सप्लाई, हाई ऑपरेटिंग कॉस्ट और अमेरिकी कपास के आयात में लंबे लीड टाइम जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, जिससे ट्रांजिशन की रफ्तार धीमी हो सकती है।
मीडियम टर्म में बनी हुई है चुनौतियां
सुब्रमण्यम के मुताबिक अमेरिका और बांग्लादेश के बीच की डील से अपने करीब 70% निर्यात पर निर्भर भारतीय कॉटन एक्सपोर्टर्स और स्पिनिंग मिलों को लॉन्ग-टर्म शॉक लग सकता है। सबसे अधिक दिक्कत स्पिनिंग कंपनियों के लिए है क्योंकि उनके धागे और कपास का प्रमुख ग्राहक बांग्लादेश ही है। साथ ही उन्हें अमेरिकी बाजार में बांग्लादेश में तैयार सस्ते माल से कड़े कॉम्पटीशन का सामना भी करना पड़ सकता है।
मनीकंट्रोल की एक एनालिसिस के हिसाब से अगर बांग्लादेश अमेरिकी कपास का इस्तेमाल कर अमेरिकी मार्केट में सस्ता माल पहुंचा देता है तो भारत करीब $150 करोड़ के कॉटन यानी कपास बिजनेस को तगड़े कॉम्पटीशन का सामना करना पड़ सकता है। सबसे अधिक रिस्क तो उस कच्ची कपास में है जो न तो कार्ड की गई है और न ही कॉम्ब की गई है, जिसमें भारत के 70% से अधिक निर्यात बांग्लादेश को होते हैं।
बांग्लादेश और अमेरिका के बीच डील से कॉटन यार्न और बुने हुए कॉटन फैब्रिक को भी झटका लग सकता है, जिनमें बांग्लादेश के आयात में भारत की बड़ी हिस्सेदारी है। कई डाइड और डेनिम फैब्रिक कैटेगरीज में भारत की हिस्सेदारी लगभग 90% तक है।
हाल ही में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारतीय कपास की जगह अमेरिकी रेशे को मंगाने का संकेत दिया था और अब अमेरिका से कारोबारी डील बांग्लादेश के टेक्सटाइल सेक्टर के लिए बड़ा प्रोत्साहन है। सुब्रमण्यम के मुताबिक दो तिमाहियों के बाद बांग्लादेश को निर्यात में 10-15% की गिरावट और स्पिनिंग यानी कताई कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन में 100-150 बेसिस प्वाइंट्स की कमी के आसार हैं।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।