
आईटी शेयरों के बुरे दिन चल रहे हैं। 12 फरवरी को आईसीआईसीआई बैंक भी वैल्यूएशन के मामले में टीसीएस से आगे निकल गया। टीसीएस देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी है। पिछले कुछ हफ्तों से भारत सहित दुनियाभर में सॉफ्टेवयर कंपनियों के शेयरों में बिकवाली हो रही है। इससे शेयरों की कीमतें लगातार फिसल रही हैं। 12 फरवरी को भी टीसीएस सहित आईटी शेयरों में बड़ी कमजोरी देखने को मिली।
SBI ने 11 फरवरी को वैल्यूएशन के मामले में TCS को पीछे छोड़ दिया था। इसकी वजह एसबीआई के शेयरों में पिछले कुछ सत्रों से जारी तेजी है, जबकि टीसीएस के शेयरों में कमजोरी का रुख है। अब ICICI Bank देश की पांचवीं सबसे बड़ी कंपनी (बैंक) बन गया है। चौथे पायदान पर एसबीआई है। एसबीआई देश का सबसे बड़ा बैंक है।
12 फरवरी को ICICI Bank के शेयरों में करीब 2 फीसदी की तेजी दिखी। इससे इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर 10.22 लाख करोड़ रुपये हो गया। TCS का शेयर 5 फीसदी नीचे चल रहा था, जिससे इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन गिरकर 10.04 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे बड़ी कंपनी है। इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 19.8 लाख करोड़ रुपये है।
HDFC Bank देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी (बैंक) है। इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 14.2 लाख करोड़ रुपये है। भारती एयरटेल 11.75 लाख करोड़ रुपये के एमकैप के साथ देश की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी है। एसबीआई 11.08 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप के साथ देश की चौथी सबसे बड़ी कंपनी है। एसबीआई के शेयरों में दिसंबर तिमाही के नतीजे आने के बाद जबर्दस्त तेजी दिख रही है। 12 फरवरी को भी इस शेयर में तेजी जारी रही।
TCS का शेयर 12 फरवरी को सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी सॉफ्टेवयर कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली है। इसकी वजह एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों के एआई टूल्स हैं। नए एआई टूल्स आईटी कंपनियों के बिजनेस के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। इस वजह से पिछले कई सत्रों से आईटी शेयरों में बड़ी बिकवाली दिख रही है।
12 फरवरी को मार्केट खुलने पर आईटी शेयरों पर दबाव देखने को मिला। Nifty IT Index 4 फीसदी से ज्यादा गिरकर 33,588 प्वाइंट्स पर आ गया। 2025 में भी निफ्टी आईटी इंडेक्स का प्रदर्शन कमजोर था। इसमें 13 फीसदी गिरावट आई थी। 2026 में अब तक यह इंडेक्स करीब 11 फीसदी टूट चुका है। इस गिरावट ने आईटी शेयरों के निवेशकों और आईटी थीम वाले म्यूचुअल फंड्स के निवेशकों को डरा दिया है।