Gold Outlook: ETF में भारी निवेश, चीन में घटती खपत; एक्सपर्ट से जानिए कैसी रहेगी गोल्ड की चाल? – gold outlook 2026 etf inflows china demand drop expert view on gold price trend above 5000 dollar


Gold Outlook: फरवरी की शुरुआत में भले ही बाजार में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन सोना 5000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के ऊपर टिके रहने में सफल रहा। जनवरी के आखिरी दिनों में भारी बिकवाली हुई थी। इससे महीने भर की तेजी का लगभग आधा हिस्सा खत्म हो गया था। इसके बावजूद Geojit Investments Limited का मानना है कि गोल्ड में ओवरऑल ट्रेंड अब भी मजबूत दिख रहा है।

जियोजीत इनवेस्टमेंट की 10 फरवरी 2026 की गोल्ड रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में लंदन स्पॉट मार्केट में सोना 5594 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। बाद में मुनाफावसूली के चलते कीमतें नीचे आईं। लेकिन, LBMA और COMEX दोनों प्लेटफॉर्म पर दाम 5000 डॉलर के ऊपर बने रहे। मासिक आधार पर सोने में 10 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज हुई।

भारत में क्यों उछला सोने का दाम?

जियोजीत इनवेस्टमेंट का मानना है कि भारत में सोने की तेजी और तेज रही। मुंबई स्पॉट मार्केट में सोना 1,51,025 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर करीब 78 प्रतिशत की बढ़त दिखाता है। वहीं फ्यूचर्स मार्केट यानी MCX पर भाव 1,57,695 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचे, जहां सालाना उछाल 93 प्रतिशत से ज्यादा रहा।

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इस तेजी के पीछे एक बड़ी वजह रुपये की कमजोरी रही। जनवरी के आखिर में रुपया 92 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर तक पहुंच गया। चूंकि सोना आयात होता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से घरेलू बाजार में कीमतें और चढ़ जाती हैं।

डॉलर इंडेक्स 97 के आसपास बना रहा, लेकिन गोल्ड और डॉलर के बीच नकारात्मक संबंध फिर से दिखाई दे रहा है। यानी अगर डॉलर कमजोर होता है तो सोने को और सपोर्ट मिल सकता है।

2025 में गोल्ड डिमांड ने बनाया रिकॉर्ड

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में वैश्विक सोने की कुल मांग 5000 टन के पार पहुंच गई, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इसमें ओटीसी गतिविधियां भी शामिल हैं। इस रिकॉर्ड के पीछे सबसे बड़ी भूमिका निवेश की रही।

जनवरी में गोल्ड ETF में 19 अरब डॉलर का रिकॉर्ड इनफ्लो आया। इसके साथ ही कुल होल्डिंग 4145 टन तक पहुंच गई, जो नया ऑल टाइम हाई है।

सेंट्रल बैंकों की खरीद भी जारी रही। दिसंबर 2025 में 19 टन की नेट खरीद हुई और पूरे साल में 328 टन का इजाफा दर्ज किया गया। चीन का केंद्रीय बैंक लगातार 15वें महीने सोना खरीदता रहा। जनवरी के अंत तक उसके पास 74.19 मिलियन फाइन ट्रॉय औंस का भंडार था।

चीन में बदल रहा है डिमांड पैटर्न

जियोजीत की गोल्ड रिपोर्ट का कहना है कि चीन में कुल सोने की खपत 2025 में 3.57 प्रतिशत घटकर 950 टन के आसपास रही। ज्वेलरी की मांग 31 प्रतिशत से ज्यादा गिर गई, लेकिन बार और कॉइन की खरीद 35 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी।

इसका मतलब साफ है। लोग गहनों की जगह निवेश के नजरिये से सोना खरीद रहे हैं। सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की मांग बढ़ रही है।

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फेड की नीति का असर

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने जनवरी की बैठक में ब्याज दरें 3.50 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखीं। चेयर जेरोम पॉवेल ने कहा कि अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत है और महंगाई व रोजगार से जुड़े जोखिम कुछ कम हुए हैं।

इसका संकेत यह है कि फेड अभी जल्दी में दरों में कटौती नहीं करेगा। साथ ही बाजार में यह चर्चा भी रही कि अगर भविष्य में नेतृत्व बदला और नीति सख्त हुई तो सोने में शॉर्ट टर्म उतार चढाव बढ़ सकता है।

टेक्निकल तस्वीर क्या कहती है

रिपोर्ट के मुताबिक शॉर्ट टर्म में सोना रेंज बाउंड रह सकता है, लेकिन मीडियम और लॉन्ग टर्म आउटलुक पॉजिटिव है। लंदन स्पॉट में 5155 डॉलर का स्तर अहम रेजिस्टेंस है। इसके ऊपर मजबूती से टिकने पर तेजी का नया चरण शुरू हो सकता है। वहीं 4650 डॉलर का स्तर मजबूत सपोर्ट माना गया है।

MCX में 1,65,000 रुपये के ऊपर टिके रहना जरूरी है ताकि तेजी बनी रहे। अगर कीमतें 1,50,000 रुपये से नीचे जाती हैं तो दबाव बढ़ सकता है।

तकनीकी संकेतकों की बात करें तो MACD में बुलिश संकेत दिख रहे हैं, यानी बाजार का रुख अब भी सकारात्मक है। हालांकि RSI ओवरबॉट जोन में है, इसलिए बीच बीच में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।

आगे क्या संकेत मिल रहे हैं

जियोजीत इनवेस्टमेंट का मानना है कि बाजार फिलहाल दो तरफ के दबाव में है। एक ओर सेंट्रल बैंक की लगातार खरीद और ETF में मजबूत इनफ्लो सोने को सपोर्ट दे रहे हैं। दूसरी ओर भू राजनीतिक तनाव में कमी और सख्त मौद्रिक नीति की आशंका अस्थिरता बढ़ा सकती है।

फिर भी रिपोर्ट का कहना है कि जब तक वैश्विक अनिश्चितता बनी रहेगी और निवेशक जोखिम लेने से बचते रहेंगे, तब तक सोने की मांग कमजोर पड़ती नहीं दिखती। शॉर्ट टर्म में उतार चढ़ाव हो सकता है, लेकिन मीडियम और लॉन्ग टर्म में रुख अब भी मजबूत नजर आता है।

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