
Budget impact on Stock market : बजट में STT पर हुए एलान ने आज बाजार का मूड बिगाड़ दिया। सेंसेक्स, निफ्टी भारी गिरावट के साथ बंद हुए। मिडकैप, स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली रही। IT को छोड़ BSE के सभी सेक्टर इंडेक्स गिरे हैं। कैपिटल मार्केट और डिफेंस में सबसे ज्यादा गिरावट रही। मेटल, PSE और एनर्जी इंडेक्स गिरकर बंद हुए हैं। तेल-गैस, FMCG और ऑटो शेयरों पर भी दबाव रहा। वहीं, निफ्टी IT इंडेक्स करीब 1.5% चढ़कर बंद हुआ। सेंसेक्स 1547 प्वाइंट गिरकर 80,723 पर बंद हुआ। निफ्टी 495 प्वाइंट गिरकर 24,825 पर बंद हुआ। आज सेंसेक्स के 30 में 26 शेयरों में गिरावट रही। निफ्टी के 50 में 43 शेयरों में गिरावट रही। बैंक निफ्टी के सभी 14 शेयरों में गिरावट रही।
बाज़ार में अचानक आई तेज़ गिरावट का सबसे बड़ा कारण सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का प्रस्ताव रहा। STT एक ऐसा टैक्स है जो भारत सरकार भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर ट्रेड किए जाने वाले शेयरों की खरीद और बिक्री पर लगाती है। वित्त मंत्री ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रांजैक्शन पर STT बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। सीतारमण ने फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस ट्रांजैक्शन पर पहले के 0.01% से बढ़ाकर 0.15% करने का प्रस्ताव रखा है, जो 50% से ज़्यादा की बढ़ोतरी है।
कोटक सिक्योरिटीज का कहना है कि पिछले साल की बढ़ोतरी के बाद, फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर STT में भारी बढ़ोतरी से ट्रेडर्स, हेजर्स और आर्बिट्रेजर्स के लिए इम्पैक्ट कॉस्ट बढ़ने की संभावना है। इससे डेरिवेटिव एक्टिविटी कम हो सकती है और वॉल्यूम में कमी आ सकती है। ऐसा लगता है कि इसका मकसद रेवेन्यू बढ़ाने के बजाय वॉल्यूम को कंट्रोल करना है, क्योंकि रेवेन्यू में किसी भी संभावित बढ़ोतरी की भरपाई कम डेरिवेटिव वॉल्यूम से हो सकती है।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च के SVP अजीत मिश्रा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बाज़ार इस टैक्स में कुछ राहत या कोई बदलाव न होने की उम्मीद कर रहा था, लेकिन STT में बढ़ोतरी ने सेंटीमेंट को हिट किया है। उन्होंने आगे कहा कि STT में बढ़ोतरी पर मार्केट का नेगेटिव रिएक्शन ज़्यादातर सेंटीमेंट बेस्ड है। यह खासकर डेरिवेटिव सेगमेंट में ज़्यादा ट्रांजैक्शन कॉस्ट से जुड़ा है जो डेली वॉल्यूम में काफी योगदान देता है। STT में बढ़ोतरी से सीधे तौर पर एक्टिव पार्टिसिपेंट्स के ट्रेडिंग प्रॉफिटेबिलिटी में कमी आएगी। इससे लिक्विडिटी और वॉल्यूम ग्रोथ को लेकर चिंता होती है। यही वजह है कि हमें ब्रोकरेज और एक्सचेंज स्टॉक्स पर ज़्यादा दबाव देख देखने को मिला है। शॉर्ट टर्म में, मार्केट एफिशिएंसी में किसी भी रुकावट पर मार्केट तेज़ी से रिएक्ट करते हैं, भले ही फंडामेंटल्स पर लॉन्ग-टर्म असर सीमित रहता है।
STT बढ़ोतरी का नहीं होगा कोई खास असर
एक्सपर्ट्स का कहना है कि STT बढ़ोतरी का कोई खास असर नहीं होगा। उनका कहना है कि सरकार ने कैश-बेस्ड इक्विटी ट्रेड पर ट्रांजैक्शन टैक्स को नहीं बदला है, जिससे पता चलता है कि उसका इरादा इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग कॉस्ट को महंगा करने का है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बाजार का यह रिएक्शन जल्दबाजी में हुआ रिएक्शन है, क्योंकि इस बढ़ोतरी से ऑप्शन ट्रेडिंग की कॉस्ट बहुत कम बढ़ेगी। जबकि फ्यूचर्स, जिनका BSE पर वॉल्यूम बहुत कम है, उनमें ट्रेडिंग कॉस्ट दोगुनी हो जाएगी।
जाने-माने जॉबिंग और आर्बिट्राज इक्विटी ब्रोकरों में से एक, क्रॉससीज कैपिटल के MD राजेश बाहेती का कहना है कि इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम पर मीडियम असर पड़ेगा, लेकिन मौजूदा मार्केट सेंटीमेंट को देखते हुए यह गलत समय पर उठाया गया कदम है। बाहेती ने आगे कहा, “अगर FM ने कैश-बेस्ड ट्रेड पर STT कम किया होता और डेरिवेटिव्स पर बढ़ाया होता, तो यह अच्छा होता। यह आर्बिट्राज फंड्स के लिए भी निराशाजनक है।”
डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।