
बीएसई, एंजल वन और ग्रो के शेयरों में 1 फरवरी को 10 फीसदी तक की गिरावट आई। इसकी वजह बजट में एसटीटी बढ़ाने का ऐलान है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया है। ऑप्शंस पर एसटीटी 0.1 से बढ़ाकर 0.15 फीसदी कर दिया गया है।
इस ऐलान के बाद निफ्टी कैपिटल मार्केट इंडेक्स 6 फीसदी तक गिर गया। एमसीएक्स, नुवामा, एनएएम-इंडिया के शेयरों में भी गिरावट आई। सरकार ने कमोडिटी ट्रेडिंग पर टैक्स नहीं बढ़ाया है। वित्तमंत्री ने यह भी कहा कि बायबैक को अब कैपिटल गेंस के रूप में लिया जाएगा। उन पर स्लैब रेट्स के हिसाब से टैक्स लगेगा। बड़े शेयरधारकों को अतिरिक्त बायबैक टैक्स चुकाना पड़ेगा।
कोटक सिक्योरिटीज के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ श्रीपाल शाह ने कहा, “फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस पर एसटीटी बढ़ने से ट्रेडर्स, हेजर्स और आर्बिट्रेजर्स के लिए इम्पैक्ट कॉस्ट बढ़ जाएगी।” उन्होंने कहा कि इससे डेरिवेटिव्स में एक्टिविटी पर असर पड़ेगा। इससे वॉल्यूम घटेगा। ट्रेडर्स एसटीटी या एलटीसीजी में राहत मिलने की उम्मीद कर रहे थे।
स्टॉक मार्केट्स के एनालिस्ट अंबरिश बालिगा ने रायटर्स को बताया, “डेरिवेटिव्स पर एसीटीटी बढ़ने से मार्केट पर निगेटिव असर पड़ेगा। इससे लिक्विडिटी घट जाएगी। सरकार ने कैश मार्केट के निवेशकों को एसटीटी में राहत नहीं दी। फॉरेन इनवेस्टर्स को अट्रैक्ट करने के लिए भी उपायों के ऐलान नहीं हुए। इसका मार्केट पर निगेटिव असर पड़ा।” मार्केट को उम्मीद थी कि वित्तमंत्री बजट में एसटीसीजी और एलटीसीज में राहत का ऐलान करेंगी। लेकिन, ऐसा नहीं होने से मार्केट पर खराब असर पड़ा।
कारोबार खत्म होने पर ग्रो का शेयर 3.05 फीसदी गिरकर 167.99 रुपये पर बंद हुआ। एंजल वन का शेयर 10.30 फीसदी गिरकर 266.50 रुपये पर क्लोज हुआ। बीएसई के शेयर 10.19 फीसदी गिरकर 2,570 रुपये पर बंद हुए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एसटीटी बढ़ने से डेरिवेटिव्स में वॉल्यूम घटेगा, जिसका असर बीएसई और ब्रोकरेज फर्मों के रेवेन्यू पर पड़ेगा।