Budget 2026-27: टैक्स में राहत से क्रिप्टो और डिजिटल एसेट्स में ट्राजेक्शंस का बढ़ेगा वॉल्यूम – budget 2026-27 tax rationalization for virtual digital assets will boost crypto volume in india nirmala sitharaman



फाइनेंस एक्ट, 2022 इंडिया के टैक्स पॉलिसी फ्रेमवर्क के लिए खास है। इसके जरिए क्रिप्टोकरेंसी और दूसरे डिजिटल एसेट्स को टैक्स के तहत लाया गया। टैक्सेशन के लिहजा से ऐसे एसेट्स को वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (वीडीए) कहा जाता है। वित्तमंत्री निर्मला सीतामरण ने अपने 2022 के अपने बजट भाषण में कहा डिजिटल एसेट्स में बढ़ते ट्रांजेक्शंस को देखते हुए एक अलग टैक्स फ्रेमवर्क पेश करना जरूरी हो गया है।

संसद में पेश डेटा के मुताबिक, FY25 में क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजेक्शंस की वैल्यू 51,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रही। यह एक साल पहले के मुकाबले 41 फीसदी ज्यादा है। इससे टीडीएस कलेक्शन 511.8 करोड़ पहुंच गया। यह इस बात का संकेत है कि वीडीए अब इंडियन फाइनेंशियल मार्केट का एक बड़ा सेगमेंट बन गया है।

इसके बावजूद वीडीए को लेकर नियम और कानून स्पष्ट नहीं हैं। 2022 में पेश टैक्स फ्रेमवर्क काफी सख्त है। वीडीए से हुए प्रॉफिट पर 30 फीसदी फ्लैट रेट से टैक्स लगता है। किसी तरह के डिडक्शन या लॉस को कैरी-फॉरवर्ड करने की इजाजत नहीं है। टैक्स के इस सख्त नियम और रेगुलेटरी अनिश्चितता की वह ट्रेडिंग वॉल्यूम विदेश स्थित एक्सचेंजों की तरफ शिफ्ट हो रहा है।

सरकार ने वीडीए ट्रांजेक्शंस के मामले में कंप्लायंस बढ़ाने और पारदर्शिता के लिए कई कदम उठाए हैं। वर्चुअल एसेट सर्विस देने वालों को फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट के साथ खुद को रजिस्टर कराना पड़ता है। साथ ही सख्त KYC और एंटी-मनी लाउंड्रिंग के नियमों का पालन करना पड़ता है। यूनियन बजट 2025 में वीडीए ट्रांजेक्शंस के लिए रिपोर्टिंग नियमों का और विस्तार किया गया।

भारत ने 2027 तक ओईसीडी के क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क को लागू करने का वादा किया है। फाइनेंस मिनिस्ट्री के अगले साल मल्टीलैटरल कंपिटेंट अथॉरिटी एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद है। इससे वीडीए से ग्लोबल ट्रांसपेरेंसी स्टैंडर्ड्स लागू होंगे। ऐसे में यूनियन बजट 2026 डिजिटल एसेट्स के टैक्स के नियमों को तर्कसंगत बनाने का बड़ा मौका है। सरकार निम्नलिखित मसलों पर ध्यान दे सकती है:

-टैक्स रीजीम की समीक्षा

वीडीए ट्रांजेक्शंस पर टीडीएस के रेट्स में कमी की जा सकती है। लॉसेज को सेट-ऑफ या कैरी-फॉरवर्क करने की इजाजत दी जा सकती है। प्रॉफिट पर 30 फीसदी टैक्स को कम किया जा सकता है। इससे वीडीए ट्रांजेक्शंस का वॉल्यूम बढ़ेगा और कंप्लांयस में दिलचस्पी बढ़ेगी। साथ ही इनवेस्टर्स को विदेशी एक्सचेंजों का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

-वीडीए से हुए मुनाफे की कैटेगरी

अभी भारत में क्रिप्टो से हुए मुनाफे की कैटेगरी तय नहीं है। इस बार में तस्वीर साफ नहीं है कि इसे कैपिटल एसेट माना जाएगा या स्टॉक-इन-ट्रेड। हालांकि, टैक्स रेट एक समान हैं, लेकिन इनकम की कैटेगरी का असर कंप्लायंस, डिसक्लोजर रिक्वायरमेंट और कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन के निर्धारण पर पड़ता है। इसलिए यह तय करना जरूरी है कि मुनाफे को बिजनेस इनकम माना जाएगा या कैपिटल गेंस।

-कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन का निर्धारण

गेंस के कैलकुलेशन के दौरान कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन का निर्धारण दूसरा चैलेंज है। इनवेंट्रीज को कॉस्ट या एनआरवी पर मापा जाता है। इनमें से जो कम होती है वह लागू होता है। वीडीए को जहां स्टॉक-इन ट्रेड/इनवेंट्री रखा जाता है, वहां उलझन होती है। ऐसे मामलों में वैल्यूएशन के सही मेथड के लिए स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है।

-गिफ्टेड वीडीए की वैल्यूएशन

जहां वीडीए गिफ्ट के रूप में मिला होता है, उसमें सेक्शन 56 के तहत रिसिपियंट पर टैक्स की देनदारी बनती है। हालांकि, निर्धारित एफएमवी वैल्यूएशन मैकेनिज्म नहीं होने से ऐसे रिसिपियंट पर टैक्स की लायबिलिटी तय करने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

-नॉन-रेजिडेंट्स के लिए टैक्स

नॉन-रेजिडेंट्स के मामले में अगर इनकम भारत में हुई है तो उस पर टैक्स भारत में बनता है। वीडीए के मामले में बड़ा मसला उसके साइटस का है, क्योंकि इंटैंजिबल एसेट्स में आम तौर पर भारत में टैक्स के लिहाज से ओनर के रेजिडेंस का नियम लागू होता है।

अमित बाबलानी-पार्टनर, डेलॉयट इंडिया



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