
1 फरवरी को यूनियन बजट 2026 पेश होने वाला है। इस दौरान डिफेंस से जुड़े स्टॉक्स पर भी फोकस रहेगा। निवेशक डिफेंस खर्च में मामूली बढ़ोतरी और स्वदेशीकरण पर लगातार जोर की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि एलोकेशन के मोर्चे पर बाजार किसी बड़े सरप्राइज की उम्मीद नहीं कर रहा है। लेकिन फिर भी मार्केट पार्टिसिपेंट सिर्फ प्रमुख घोषणाओं और आंकड़ों के बजाय एग्जीक्यूशन की गति, ऑर्डर के तेजी से फाइनलाइजेशन और खरीद टाइमलाइन पर स्पष्टता के संकेतों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
बाजार के जानकारों को उम्मीद है कि डिफेंस बजट में सालाना आधार पर 8-10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि उच्च एलोकेशन मध्यम अवधि में राहत देते हैं, लेकिन स्टॉक का प्रदर्शन इस बात पर अधिक निर्भर करेगा कि कॉन्ट्रैक्ट कितनी जल्दी दिए जाते हैं। साथ ही इस पर भी कि प्रोजेक्ट अप्रूवल से एग्जीक्यूशन तक कैसे आगे बढ़ते हैं और मैन्युफैक्चरर्स को पेमेंट कैसे मिलते हैं। फोकस कैपिटल खर्च पर रहने की उम्मीद है, जिसमें घरेलू सोर्सिंग को प्राथमिकता मिलती रहेगी।
किन शेयरों पर रहेगी नजर
डिफेंस PSUs में, मजबूत ऑर्डर बुक और एग्जीक्यूशन की स्पष्टता वाली कंपनियों के बजट के मौके पर फोकस में रहने की संभावना है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स को अपने एयरक्राफ्ट और इंजन मैन्युफैक्चरिंग पाइपलाइन से फायदा होता दिख रहा है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार और कम्युनिकेशन सिस्टम में एक प्रमुख खिलाड़ी बनी हुई है। मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग में अपनी पैठ के चलते भारत डायनेमिक्स के निवेशकों के रडार पर रहने की उम्मीद है। इसके अलावा मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स जैसी जहाज बनाने वाली कंपनियों पर भी नजर रहेगी।
स्वदेशीकरण पर जोर बना हुआ है। प्राइवेट सेक्टर के डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के भी ध्यान खींचने की उम्मीद है। लार्सन एंड टुब्रो बड़े प्लेटफॉर्म और सिस्टम इंटीग्रेशन प्रोजेक्ट्स का एक प्रमुख लाभार्थी बना हुआ है। भारत फोर्ज, डेटा पैटर्न्स और एस्ट्रा माइक्रोवेव जैसी कंपनियों को कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और सबसिस्टम के बढ़ते लोकलाइजेशन से फायदा होता दिख रहा है।
मिरे एसेट शेयरखान के AVP फंडामेंटल रिसर्च, अंकित सोनी के अनुसार, “बाजार को डिफेंस सेक्टर के लिए बेहतर स्पष्टता की उम्मीद है। अतिरिक्त एलोकेशन मुख्य रूप से ड्रोन, हथियार और गोला-बारूद, डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वदेशीकरण की ओर डायरेक्ट होंगे।” उन्होंने आगे कहा कि मुख्य चुनौती एग्जीक्यूशन बनी हुई है। ऑर्डर फाइनल होने में देरी से टाइमलाइन आगे बढ़ रही है और निकट-अवधि के रेवेन्यू की स्पष्टता प्रभावित हो रही है।
निवेशकों के सिलेक्टिव रहने की उम्मीद
ब्रोकरेज का कहना है कि अधिकांश आशावाद पहले ही स्टॉक की कीमतों में दिख चुका है। इसलिए डिफेंस इक्विटी पर बजट का असर सेक्टर-व्यापी होने के बजाय स्टॉक-विशिष्ट होने की संभावना है। निवेशकों के सिलेक्टिव रहने की उम्मीद है। वे एग्जीक्यूशन की स्पष्ट टाइमलाइन, मजबूत कैश फ्लो और लंबी अवधि की कमाई की स्पष्टता वाली कंपनियों को पसंद करेंगे। बजट 2026 पर पॉलिसी में निरंतरता और आने वाले सालों में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग की गति बरकरार रखने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता के संकेतों के लिए बारीकी से नजर रखी जाएगी।