
कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI ने PwC और EY की भारतीय यूनिट्स के मौजूदा और पुराने एग्जीक्यूटिव्स पर इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। मामला साल 2022 में यस बैंक की शेयर सेल से जुड़ा है। रॉयटर्स के मुताबिक, नोटिस में कहा गया है कि SEBI ने अमेरिका की प्राइवेट इक्विटी फर्म्स कार्लाइल ग्रुप और एडवेंट इंटरनेशनल के एग्जीक्यूटिव्स पर भी डील से जुड़ी अनपब्लिश्ड प्राइस सेंसिटिव इनफॉरमेशन लीक करने का आरोप लगाया है। यह इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों का उल्लंघन है।
नोटिस नवंबर 2025 में जारी हुआ। आरोप है कि PwC और EY के दो एग्जीक्यूटिव्स और परिवार के 5 अन्य सदस्यों और दोस्तों ने यस बैंक की 2022 की शेयर सेल से पहले उसके शेयरों में ट्रेडिंग करके गैर-कानूनी फायदा कमाया। ज्यादातर आरोपी अभी भी अपनी-अपनी फर्म्स में काम कर रहे हैं। SEBI के नोटिस से पता चला कि कार्लाइल, एडवेंट, PwC और EY के इंडिया एग्जीक्यूटिव्स ने अनपब्लिश्ड प्राइस सेंसिटिव जानकारी शेयर की। यस बैंक के एक पुराने बोर्ड मेंबर पर भी प्राइस सेंसिटिव जानकारी शेयर करने का आरोप है।
SEBI का यह नोटिस जुलाई, 2022 की शेयर सेल से पहले यस बैंक के शेयरों में उतार-चढ़ाव की जांच के बाद आया है। शेयर बिक्री के दौरान कार्लाइल और एडवेंट ने 1.1 अरब डॉलर में यस बैंक में कुल 10% हिस्सेदारी खरीदी थी। 29 जुलाई, 2022 को इस डील की घोषणा हुई।
जवाब का ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं आरोपी
रॉयटर्स के मुताबिक, जांच से जुड़े दो लोगों का कहना है कि आरोपी अपनी कंपनियों के साथ, SEBI के नोटिस पर अपने जवाब का ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं। कारण बताओ नोटिस जांच पूरी होने के बाद SEBI का पहला कदम होता है, और इसका मकसद आरोपियों और एंटिटीज से जवाब मांगना होता है। अगर इसे बरकरार रखा जाता है, तो उन्हें इंडियन सिक्योरिटीज रेगुलेशन के तहत पैसे की पेनल्टी या पाबंदियों का सामना करना पड़ सकता है। इनसाइडर ट्रेडिंग वाले ऐसे मामले, जिनमें ग्लोबल कंसल्टेंट्स और प्राइवेट इक्विटी फर्मों के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स पर आरोप हैं, उनमें रेगुलेटरी एक्शन बहुत कम देखने को मिलता है।
नोटिस में कुल 19 लोगों पर इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। उनमें से 7 ने पहले से पता जानकारी के आधार पर ट्रेडिंग की और 4 ने वह जानकारी शेयर की। कंप्लायंस की कमजोर प्रोसेस के लिए PwC और EY के 8 एग्जीक्यूटिव्स के नाम लिए गए हैं।
कैसे शुरू हुआ खेल
यस बैंक के शेयर खरीदने से पहले एडवेंट ने टैक्स एडवाइजरी सर्विसेज के लिए EY को हायर किया और फर्म से यस बैंक के मैनेजमेंट पर फीडबैक मांगा। वहीं यस बैंक ने वैल्यूएशन का काम करने के लिए EY मर्चेंट बैंकिंग सर्विसेज को हायर किया था। लगभग उसी समय, कार्लाइल और एडवेंट ने टैक्स प्लानिंग और ड्यू डिलिजेंस के लिए PwC को हायर किया था। SEBI ने पाया कि EY और PwC दोनों के एग्जीक्यूटिव्स ने गोपनीयता के नियमों को तोड़ा, जिससे कुछ लोगों को डील होने से पहले यस बैंक के शेयरों में ट्रेड करने की इजाजत मिल गई।
SEBI ने कहा, “जिन लिस्टेड कंपनियों के साथ EY एडवाइजरी, कंसल्टिंग, वैल्यूएशन, इनवेस्टमेंट बैंकिंग या कॉर्पोरेट फाइनेंस सर्विस (ऑडिट के अलावा) के लिए जुड़ी हुई थी, उनमें ट्रेडिंग या इनवेस्ट करने पर कभी कोई रोक नहीं लगाई गई।” PwC के मामले में, SEBI ने कहा कि फर्म के पास एडवाइजरी और कंसल्टिंग क्लाइंट्स के लिए “रिस्ट्रिक्टेड स्टॉक लिस्ट” नहीं थी।
SEBI ने EY इंडिया के चेयरमैन और CEO, राजीव मेमानी और फर्म के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर से यह बताने के लिए कहा है कि पेनल्टी क्यों नहीं लगाई जानी चाहिए। भारत में PwC के चीफ इंडस्ट्रीज ऑफिसर अर्नब बसु और दो पुराने एग्जीक्यूटिव्स से भी SEBI ने फर्म में सही कोड-ऑफ-कंडक्ट फ्रेमवर्क लागू करने में नाकाम रहने के लिए जवाब देने को कहा है। मेमानी और बसु, दोनों पर किसी भी गलत काम का आरोप नहीं लगाया गया है।