
Budget 2026 Stock Market Strategy: घरेलू स्टॉक मार्केट में पिछले कुछ समय से एक रेंज में उठा-पटक दिख रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार रविवार 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। इसके पेश होने के पहले बाजार के कंसालिडेशन से यह संकेत मिल रहा है कि मार्केट अब मोमेंटम के पीछे भागने की बजाय स्पष्टता का इंतजार कर रहा है। जियोपॉलिटिकल टेंशन और अमेरिकी टैरिफ के साए में निफ्टी किसी एक तरफ भागने की बजाय बजट के इंतजार में है। घरेलू मोर्चे पर बात करें तो वित्त वर्ष 2026 में 6.5%-7% की रफ्तारसे ग्रोथ की उम्मीदों के बीच निवेशकों की नजर इस बात पर है कि सरकार आर्थिक रफ्तार और सरकारी खजाने के अनुशासन के बीच कैसे संतुलन बनाती है।
यह संतुलन वित्त वर्ष 2026 के बाद ऐसे समय में काफी अहम हो जाता है, जब सरकार ने ₹11.21 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर का वादा किया है जोकि जीडीपी का 3.1% है और पहले के अनुमानों से करीब 10% अधिक है। चूंकि मार्केट में इस समय काफी अस्थिरता है तो मार्केट का ध्यान फिलहाल इरादों की बजाय इस बात पर है कि काम कैसे हो रहा है और ऐसे में बजट अहम टर्निंग प्वाइंट बन सकता है। यहां पांच ऐसी उम्मीदें दी जा रही हैं, जो पूरी हुई तो बजट के बाद मार्केट सरपट ऊपर दौड़ लगा सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक खर्च
कैपिटल एक्सपेंडिचर में अगर उम्मीद से अधिक यानी 10-15% की बढ़ोतरी हो ताकि यह ₹12-₹12.5 लाख करोड़ यानी जीडीपी के करीब 3.2% पर पहुंच जाए और इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक जोर हो तो यह मार्केट के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर बन सकता है। तेजस खोड़े का कहना है कि अब इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च कोई विकल्प नहीं रहा और अगर सरकार इसे बढ़ाती है तो इससे तुरंत सेंटीमेंट सुधरेगा, क्योंकि यही देश के ग्रोथ की सबसे बड़ी रुकावट है। उनका कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कैपेक्स में तेज बढ़ोतरी ज़रूरी है। सड़कों, रेलवेज, बंदरगाहों और समुद्री रास्तों पर लगातार निवेश के बिना इकोसिस्टम का विस्तार संभव नहीं है।
रंजीत झा का कहना है कि पब्लिक सेक्टर में निवेश अक्सर पूरे साइकिल की दिशा तय करता है। उनका कहना है कि जब सरकार कैपेक्स बढ़ाती है, तो प्राइवेट इंवेस्टर्स का भी भरोसा बढ़ता है और तब मार्केट में भी जोश आता है। पब्लिक कैपेक्स का जीडीपी पर 1.5 से 2 गुना तक का मल्टीप्लायर प्रभाव माना जाता है, साथ ही इससे लॉजिस्टिक्स लागत भी कम होती है जोकि फिलहाल चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अब भी अधिक है। काम पूरा होने की अधिक उम्मीदों पर सीमेंट, स्टील, कैपिटल गुड्स और कंस्ट्रक्शन जैसे साइक्लिकल सेक्टर्स को फायदा मिलता है।
हाई ग्रोथ वाले रणनीतिक क्षेत्रों पर फोकस
मार्केट को लॉन्ग टर्म स्ट्र्क्चरल ग्रोथ थीम के लिए तेज नीतिगत फोकस और अधिक बजट एलोकेशन की उम्मीद है। विकास गुप्ता के मुताबिक डिफेंस, क्लीन एनर्जी, रेलवेज, एआई, डेटा सेंटर, मैन्युफैक्चरिंग और आरएंडडी जैसे क्षेत्रों में औसत से अधिक खर्च, साथ ही पीएलआई स्कीम्स और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से जुड़ी एफडीआई नीतियों में सुधार से थीमैटिक मोमेंटम फिर मजबूत हो सकता है। उनका कहना है कि इन थीम से जुड़े सेक्टर बजट के आस-पास काफी एक्टिव हो जाते हैं, खासतौर से तब, जब आवंटन उम्मीद से बेहतर हो। विकास का यह भी कहना है कि आरएंडडी को प्रोत्साहन देने से आईटी और फार्मा जैसे सेक्टर्स पर सीधा असर पड़ सकता है।
लोगों के हाथ में आए अधिक पैसे
कैपेक्स से मीडियम टर्म ग्रोथ को सपोर्ट मिलता है लेकिन नियर-टर्म मार्केट सेंटिमेंट अब भी खपत में रिकवरी पर निर्भर है। रंजीत झा के मुताबिक अगर सरकार के ऐलानों से आम लोगों के हाथ में पैसा बढ़ता है तो मांग अपने आप बढ़ती है। उन्होंने मौजूदा रिकवरी साइकिल में खपत को मिसिंग कड़ी बताया यानी कि मार्केट में अभी जो रिकवरी हो रही है, उसमें खपत खास नहीं बढ़ी है तो अगर खपत भी बढ़ती है तो मार्केट रॉकेट बन सकता है। स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी, आम टैक्सपेयर्स के हिसाब से टैक्स स्लैब में पॉजिटिव बदलाव जैसे ऐलानों से ऑटो और रिटेल सेक्टरों में मांग फिर से तेज हो सकती है। मार्केट को जीएसटी रिफॉर्म जैसे अप्रत्यक्ष सुधारों की बजाय प्रत्यक्ष बदलावों का इंतजार है जो आम लोगों की तुरंत खर्च करने की क्षमता बढ़ाए।
कैपिटल गेन्स टैक्स पर स्थिरता
तेजस खोड़े का कहना है कि मार्केट के लिए कभी-कभी कोई निगेटिव सरप्राइज न होना भी सबसे मजबूत पॉजिटिव ट्रिगर होता है। कैपिटल गेंस टैक्स और STT (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) पर स्थिरता के स्पष्ट संकेत, साथ ही किसी भी तरह का सरलीकरण या मामूली राहत से घरेलू निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है। तेजस का कहना है कि कैपिटल मार्केट को रेवेन्यू का जरिया बनाना किसी झटका से कम नहीं होगा और इससे निवेशकों का मनोबल टूट सकता है।
कस्टम नियमों में बदलाव के जरिए निर्यात और कारोबार को सपोर्ट
जैसे-जैसे वैश्विक सप्लाई चेन ट्रैक पर आ रही है, कस्टम ड्यूटी में रिफॉर्म, एक्सपोर्ट इंसेंटिव या रणनीतिक द्विपक्षीय सौदों से एक्सपोर्ट सेक्टर्स को सपोर्ट मिल सकता है। रंजीत झा का कहना है कि भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच सौदे, यूएई के साथ डिफेंस साझेदारी के विस्तार और बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री में चल रही दिक्कतों से भारत के लिए बड़े मौके तैयार हुए हैं और नीतिगत सपोर्ट के जरिए इसका फायदा उठाया जा सकता है। रंजीत के मुताबिक वैश्विक ग्रोथ असमान रहने के बावजूद अगर इनपुट लागत घटती है और बिजनेस बढ़ता है तो भारत एक मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर केरूप में आकर्षक बनता है। रंजीत का कहना है कि टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वैलरी और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे एक्सपोर्ट पर आधारित सेक्टर मार्जिन और वॉल्यूम दोनों मोर्चों पर फायदा उठा सकते हैं।
यूनियन बजट में ये ऐलान हुए तो गोल्ड निवेशकों की होगी चांदी” href=”https://hindi.moneycontrol.com/news/your-money/budget-2026-expectations-these-announcements-in-union-budget-will-boost-gold-investors-2351567.html?utm_source=budget_2025&utm_medium=mobile&utm_campaign=Budget_Top_Stories” target=”_blank”>Budget 2026 Expectations: यूनियन बजट में ये ऐलान हुए तो गोल्ड निवेशकों की होगी चांदी
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