India-EU समझौते से किन शेयरों की चमकेगी किस्मत? इन 3 थीम में एक्सपर्ट्स को दिख रहा बड़ा मौका – india eu fta trade deal textile pharma chemical which stocks are better placed



India-EU trade deal: भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच आज 27 जनवरी को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का ऐलान हुआ। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” के रूप में देखा जा सकता है, जो शेयर बाजार में लंबे समय से चली आ रही सुस्ती को तोड़ने में मदद कर सकता है। इसी उम्मीद के चलते आज टेक्सटाइल कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली।

फिलहाल भारत के कुल एक्सपोर्ट में यूरोपीय यूनियन की हिस्सेदारी करीब 17% है। ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल के मुताबिक, यह द्विपक्षीय समझौता भारत से यूरोपीय यूनियन को एक्सपोर्ट को लगभग 50 अरब डॉलर तक बढ़ा सकता है।

ब्रोकरेज ने कहा कि इंपोर्ट में बेहतर एफिशियंसी और विदेशी निवेश (FDI) में बढ़ोतरी से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और नई तकनीक का आदान-प्रदान आसान होगा। साथ ही, अगर नियमों में ज्यादा स्पष्टता और स्थिरता आती है, तो आईटी सर्विसेज के एक्सपोर्ट को भी फायदा मिल सकता है।यूरोपीय यूनियन की पहले से ही भारत के कुल आईटी सर्विसेज एक्सपोर्ट में करीब एक-तिहाई हिस्सेदारी है।

कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा फायदे में?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत-यूरोपीय यूनियन समझौते से जिन सेक्टर्स को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है, उनमें फार्मा, टेक्सटाइल और केमिकल सेक्टर शामिल हैं। हालांकि, एमके ग्लोबल ने यह भी कहा कि भारत-EU समझौते से शेयर बाजार में कुछ पॉजिटिविटी जरूर लौटेगी। हालांकि इसके बावजूद भारत-अमेरिका के बीच समझौता, रुपये में स्थिरता और ग्लोबल स्तर पर अनिश्चितता में कमी अभी भी बाजार की चाल के लिए जरूरी बने रहेंगे।

1. टेक्सटाइल सेक्टर

भारत के कुल टेक्सटाइल और रेडीमेड कपड़ों के एक्सपोर्ट में यूरोपीय यूनियन (EU) की हिस्सेदारी करीब 38 फीसदी है। लेकिन, EU के कुल टेक्सटाइल इंपोर्ट में भारत का हिस्सा सिर्फ 5 फीसदी ही है। हालांकि भारतीय टेक्सटाइल कंपनियों को अभी यूरोपीय यूनियन में 10 से 12 प्रतिशत के बीच टैरिफ देने पड़ता है। वहीं बांग्लादेश, वियतनाम, इथियोपिया में FTA के जरिए 0 प्रतिशत टैरिफ लगता है।

एमके ग्लोबल के मुताबिक, अगर भारत पर लगने वाला टैरिफ 10–12 फीसदी से घटकर 0 फीसदी हो जाता है, तो भारतीय कंपनियों की कीमतों के स्तर पर बढ़त मिलेगा। इससे भारत वियतनाम और बांग्लादेश के बराबर आ जाएगा। ब्रोकरेज का मानना है कि ऐसे में भारत निटवेयर, आउटरवियर और ट्राउजर जैसे सेगमेंट में ज्यादा बाजार हिस्सेदारी हासिल करने की मजबूत स्थिति में होगा।

इन शेयरों पर रखें नजर

अगर भारत वेजिटेबल टेक्सटाइल फाइबर, पेपर यार्न और बुने हुए कपड़ों इंपोर्ट ड्यूटी कम करता है, तो इससे भारतीय फैब्रिक बनाने वाली कंपनियों को फायदा होगा। वजह यह है कि उनके कच्चे माल की लागत घट जाएगी। इस बदलाव से सबसे ज्यादा फायदा अरविंद (Arvind), वर्धमान टेक्सटाइल्स (Vardhman Textiles) और केपीआर मिल्स (KPR Mills) जैसी कंपनियों को मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, अगर यूरोपीय यूनिटन टेक्सटाइल पर टैरिफ जोरो कर देता है, तो भारत बांग्लादेश और वियतनाम से निटवेयर, आउटरवियर और ट्राउजर में ज़्यादा मार्केट शेयर हासिल करने की अच्छी स्थिति में होगा, जिससे KPR मिल्स को फायदा होगा।

2. फार्मा सेक्टर

भारत का यूरोपीय यूनियन (EU) को फार्मा फॉर्मुलेशन का एक्सपोर्ट 2.95 अरब डॉलर है, जो भारत के कुल फार्मा फॉर्मुलेशन एक्सपोर्ट का करीब 12 फीसदी बनता है। इसके बावजूद, यूरोपीय यूनियन के कुल फार्मा इंपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2.2 फीसदी है। इसका मतलब है कि आगे काफी ज्यादा बढ़ने की गुंजाइश है।

एमके के मुताबिक, EU में दवाओं की मंजूरी की प्रक्रिया काफी धीमी है। आमतौर पर इसमें 2 से 3 साल लग जाते हैं और फीस भी ज्यादा होती है। सख्त नियमों और कागजी कार्रवाई की वजह से जेनेरिक दवाओं को EU बाजार में एंट्री मिलने में देरी होती है। अगर भारत-EU समझौते के तहत नियमों में सहयोग बढ़ता है, तो इससे दवाओं की तेज मंजूरी, आवेदन की लागत में कमी और जेनेरिक दवाओं को आसान मंजूरी मिलने का रास्ता साफ होगा।

इससे भारतीय जेनेरिक कंपनियां EU में अपना कारोबार तेजी से बढ़ा सकेंगी, ज्यादा टेंडर जीत पाएंगी और अमेरिका पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, इससे यूरोपीय फार्मा कंपनियों को भी लागत और सप्लाई के लिहाज से लचीलापन मिलेगा, जिसका फायदा भारतीय CDMO कंपनियों को भी हो सकता है। इसके अलावा, भारतीय बायोसिमिलर कंपनियों को भी EU बाजार में जल्दी और आसानी से एंट्री मिलने की संभावना है।

इन शेयरों पर रखें नजर

बायोसिमिलर: बायोकॉन (Biocon) और डॉ रेड्डीज लैब्स (Dr Reddy’s Labs)

जेनेरिक दवाएं: ल्यूपिन (Lupin), अरबिंदो फार्मा (Aurobindo Pharma), टोरेंट फार्मा (Torrent Pharma), IPCA लैबोरेटरीज और सन फार्मा (Sun Pharma)

3. केमिकल सेक्टर

भारत कुल मिलाकर केमिकल्स का शुद्ध इंपोर्टर है। भारत सबसे ज्यादा बल्क केमिकल्स जैसे PVC, एपॉक्सी रेजिन, पॉलीकार्बोनेट, फिनॉल आदि का आयात करता है। साल 2024 में भारत ने 71 अरब डॉलर के केमिकल्स आयात किए, जबकि 39 अरब डॉलर का निर्यात किया।

हालांकि, यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ केमिकल बिजनेस में भारत की स्थिति बेहतर है। साल 2024 में भारत ने यूरोपीय यूनियन को 8.9 अरब डॉलर के केमिकल्स निर्यात किए, जबकि यूरोपीय यूनियन से केवल 7.7 अरब डॉलर का आयात हुआ। यानी EU के साथ भारत नेट एक्सपोर्टर है।

फिलहाल, भारत अपनी घरेलू इंडस्ट्री को बचाने के लिए कई केमिकल्स पर 0 से 10 फीसदी तक इंपोर्ट ड्यूटी लगाता है। इसके मुकाबले, यूरोपीय यूनियन, भारतीय केमिकल उत्पादों पर कम टैरिफ लगाता है, जो आमतौर पर 3 से 5 फीसदी के बीच है।

इन शेयरों पर रखें नजर

एमके ग्लोबल ने बताया कि उसने 10 से ज्यादा ऐसी कंपनियों की पहचान की है, जिनकी 15 फीसदी से ज्यादा कमाई EU देशों को होने वाले एक्सपोर्ट से आती है। इनमें SRF, नवीन फ्लोरीन, गुजराज फ्लूरोकेमिकल्स, आरती इंडस्ट्रीज, PCBL, जुबिलेंट इनग्रीविया, प्रीवी स्पेशियल्टी, तत्व चिंतन, विष्णु केमिकल्स और क्लीन साइंजेस जैसी कंपनियां शामिल हैं। भारत-यूरोपीय यूनियन के बीच FTA साइन होने से इन कंपनियों को सीधा लाभ मिल सकता है।

यह भी पढ़ें- India-EU trade deal : भारत और यूरोपीयन यूनियन के बीच ऐतिहासिक ट्रेड डील, EU के 96.6% प्रोडक्ट्स पर टैरिफ या तो घटे या खत्म हुए

डिस्क्लेमरः Moneycontrol पर एक्सपर्ट्स/ब्रोकरेज फर्म्स की ओर से दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह उनके अपने होते हैं, न कि वेबसाइट और उसके मैनेजमेंट के। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।



Source link

Scroll to Top