
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने यस बैंक (Yes Bank) के शेयरों में इनसाइडर ट्रेडिंग का बड़ा मामला पकड़ा है। सेबी के मुताबिक, यह इनसाइडर ट्रेडिंग जुलाई 2022 में यस बैंक की हिस्सेदारी बिक्री के दौरान हुई थी। SEBI ने इस मामले में PwC और EY जैसी बड़ी कंसल्टेंसी फर्मों के मौजूदा और पूर्व एग्जीक्यूटिव्स सहित 19 लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग कर Yes Bank के शेयरों में ट्रेडिंग की और गैरकानूनी मुनाफा कमाया।
क्या हुआ था 2022 में?
यस बैंक ने जुलाई 2022 में अपनी हिस्सेदारी बेचकर एक बड़ी फंडिंग जुटाई थी। इस दौरान कार्लाइल ग्रुप और एडवेंट इंटरनेशनल ने मिलकर यस बैंक की करीब 10% हिस्सेदारी को 1.1 अरब डॉलर में खरीदा थी। इस डील की घोषणा 29 जुलाई 2022 को हुई, जिसके अगले ही दिन Yes Bank के शेयर 6% तक चढ़ गए। SEBI की जांच इसी बात पर केंद्रित रही कि इस डील के ऐलान से पहले यस बैंक के शेयरों में जो गतिविधियां दिखीं, वो सामान्य थी या फिर किसी को अंदरूनी जानकारी का लाभ मिला।
SEBI की जांच में पाया गया कि कार्लाइल, एडवेंट, PwC और EY से जुड़े कुछ भारतीय अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए गोपनीय जानकारी साझा की, जिससे अन्य लोगों को ट्रेडिंग का मौका मिला। SEBI ने यस बैंक के एक पूर्व बोर्ड सदस्य पर भी मूल्य-संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप लगाया है।
किन पर लगे आरोप?
– PwC और EY के दो एग्जीक्यूटिव्स (भारतीय यूनिट्स से जुड़े)।
– कार्लाइल ग्रुप और एडवेंट इंटरनेशनल के कुछ अधिकारी।
– इन एग्जीक्यूटिव्स के परिवार के सदस्य और करीबी दोस्त (कुल 5 लोग)।
– यस बैंक के बोर्ड के एक पूर्व सदस्य
SEBI का कहना है कि ये लोग ‘कनेक्टेड पर्सन्स’ थे और उन्होंने अनपब्लिश्ड प्राइस सेंसिटिव इंफॉर्मेशन (UPSI) को साझा किया, जिससे उनके रिश्तेदारों और दोस्तों ने शेयर खरीद-बिक्री कर अवैध कमाई की। दोनों कंसल्टेंसी फर्मों पर भी आरोप है कि उन्होंने ‘रिस्ट्रिक्टेड लिस्ट’ जैसी कंप्लायंस प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया, जो क्लाइंट की जानकारी वाले कर्मचारियों को ट्रेडिंग से रोकती है।
SEBI का एक्शन और प्रभाव
SEBI ने यह नोटिस नवंबर 2025 में जारी किया गया था। सेबी का कारण बताओ नोटिस किसी भी जांच के बाद पहला औपचारिक कदम होता है, जिसके जरिए सेबी आरोपी व्यक्तियों और संस्थाओं से जवाब मांगता है। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों और कंपनियों पर जुर्माना, ट्रेडिंग प्रतिबंध या अन्य नियामकीय कार्रवाई हो सकती है।
कंसल्टिंग फर्मों पर गंभीर सवाल
SEBI की कार्रवाई इस मायने में भी अहम मानी जा रही है कि यह एक दुर्लभ मामला है, जिसमें ग्लोबल कंसल्टिंग और प्राइवेट इक्विटी फर्मों के सीनियर अधिकारियों को किसी फंडिंग राउंड से जुड़े इनसाइडर ट्रेडिंग उल्लंघन के आरोप लगे हैं।
जांच के दौरान यह सामने आया कि हिस्सेदारी बिक्री से पहले एडवेंट ने टैक्स एडवाइजरी सेवाओं के लिए EY को नियुक्त किया था और यस बैंक के मैनेजमेंट पर फीडबैक भी मांगा गया था। इसी दौरान EY मर्चेंट बैंकिंग सर्विसेज को यस बैंक के वैल्यूएशन का काम सौंपा गया। दूसरी ओर, कार्लाइल और एडवेंट ने टैक्स प्लानिंग और ड्यू डिलिजेंस के लिए PwC की सेवाएं ली थीं।
SEBI के अनुसार, दोनों फर्मों के भीतर गोपनीयता और कंप्लायंस प्रक्रियाएं कमजोर थीं। EY के मामले में नियामक ने कहा कि यस बैंक को “रिस्ट्रिक्टेड लिस्ट” में पर्याप्त व्यापक तरीके से शामिल नहीं किया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि लेनदेन से सीधे जुड़े कर्मचारियों पर तो ट्रेडिंग प्रतिबंध था, लेकिन दूसरे ऐसे कर्मचारी, जिन्हें अप्रत्यक्ष रूप से संवेदनशील जानकारी मिल सकती थी, उन पर कोई रोक नहीं थी।
PwC के मामले में SEBI ने कहा कि एडवाइजरी और कंसल्टिंग क्लाइंट्स के लिए फर्म के पास कोई स्पष्ट “रिस्ट्रिक्टेड स्टॉक लिस्ट” ही नहीं थी, जो इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के अनुपालन के लिए जरूरी मानी जाती है।
SEBI ने EY इंडिया के चेयरमैन और CEO राजीव मेमानी और फर्म के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर से भी जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। सेबी का कहना है कि EY की आंतरिक ट्रेडिंग नीति, इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के अनुरूप नहीं थी। नोटिस में कहा गया है कि ऑडिट के अलावा दूसरे एडवाइजरी, कंसल्टिंग, वैल्यूएशन या इन्वेस्टमेंट बैंकिंग सेवाओं से जुड़े सूचीबद्ध कंपनियों में ट्रेडिंग पर कोई प्रभावी प्रतिबंध नहीं लगाया गया था।
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