SIP क्यों बंद कर रहे निवेशक, किस बात का है खौफ; इससे क्या होगा नुकसान? समझिए पूरा मामला – why investors are stopping sips rising sip stoppage ratio fear of market volatility and long term wealth loss explained


सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP की शुरुआत इसलिए हुई थी, ताकि निवेश में भावनाओं की दखल कम हो और लोग अनुशासन के साथ लंबे समय में संपत्ति बना सकें। लेकिन हकीकत यह है कि भावनाएं आज भी SIP निवेशकों की सबसे बड़ी दुश्मन बनी हुई हैं।

जैसे ही बाजार में करेक्शन आता है या लंबे समय तक सुस्ती रहती है, बड़ी संख्या में निवेशक SIP बीच में ही बंद कर देते हैं। दिसंबर 2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए आने वाला निवेश 6 प्रतिशत से ज्यादा कम हो गया।

आइए जानते हैं कि निवेशक किन वजहों से SIP बंद कर रहे हैं और इससे क्या नुकसान हो सकता है।

SIP Stoppage Ratio क्यों खतरे की घंटी है

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड ऑफ इंडिया (AMFI) के आंकड़े बताते हैं कि बीते पांच सालों में SIP बंद करने का ट्रेंड लगातार तेज हुआ है।

  • FY22: 41.74%
  • FY23: 56.94%
  • FY24: 52.41%
  • FY25: 75.63%
  • FY26 (दिसंबर तक): 98.98%

FY26 में स्थिति यह हो गई कि जितनी नई SIP शुरू हुईं, लगभग उतनी ही SIP बंद भी कर दी गईं। यह आंकड़ा सामान्य ऐतिहासिक स्तर 40-50% से कहीं ज्यादा है और साफ तौर पर निवेशकों की बेचैनी दिखाता है।

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बढ़ती SIP रकम के पीछे छिपी कमजोर कड़ी

ऊपर से देखने पर लगता है कि भारत में SIP कल्चर मजबूत हो रहा है। हर साल SIP में निवेश का नया रिकॉर्ड बन रहा है।

लेकिन इसके नीचे एक कम चर्चा होने वाली सच्चाई छिपी है। SIP में पैसा तो आ रहा है, लेकिन बड़ी संख्या में SIP इतनी लंबी नहीं चल पा रहीं कि निवेशक को उनका असली फायदा मिल सके। नई SIP का रजिस्ट्रेशन धीमा हुआ है, जबकि बंद होने वाली SIP की संख्या तेजी से बढ़ी है।

निवेशक SIP बीच में क्यों छोड़ देते हैं

मार्केट का गिरना: SIP का सबसे बड़ा फायदा बाजार की गिरावट के दौरान मिलता है। जब बाजार गिरता है, तो वही मासिक निवेश ज्यादा यूनिट्स खरीदता है और औसत लागत घटती है। यही rupee cost averaging है।

लेकिन यही दौर निवेशकों के लिए सबसे ज्यादा डराने वाला भी होता है। गिरावट देखते ही घबराहट बढ़ती है और SIP रोक दी जाती है। अक्सर निवेशक सोचते हैं कि हालात सुधरने पर दोबारा SIP शुरू करेंगे, लेकिन तब तक बाजार ऊपर जा चुका होता है।

पैसों की मजबूरी: हर बार SIP रोकने की वजह डर नहीं होती। नौकरी छूटना, मेडिकल इमरजेंसी, घरेलू खर्च बढ़ना या बिजनेस में नुकसान जैसी परिस्थितियां कई निवेशकों को मजबूर कर देती हैं।

कोरोना काल इसका बड़ा उदाहरण था, जब अनिश्चितता बढ़ते ही SIP स्टॉपेज रेशियो तेज हो गया।

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अधूरी समझ: कई नए निवेशक SIP को शॉर्ट टर्म कमाई का जरिया मान लेते हैं। बुल मार्केट में उम्मीदें बहुत बढ़ जाती हैं और जैसे ही रिटर्न कमजोर पड़ता है, SIP बंद कर दी जाती है।

कुछ निवेशक सिर्फ इसलिए SIP रोक देते हैं क्योंकि उनका फंड एक साल में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया। यह सोच SIP की मूल भावना के बिल्कुल उलट है।

जल्दी बाहर निकलना: AMFI के आंकड़े बताते हैं कि Regular Plan (सलाह के साथ निवेश) में निवेशक ज्यादा समय तक टिके रहते हैं। वहीं, डायरेक्ट प्लान यानी अपनी मर्जी वाले निवेश को जल्दी बंद कर देते हैं।

5 साल से ज्यादा चलने वाली SIP में डायरेक्ट प्लान का हिस्सा सिर्फ 19% है। वहीं, रेगुलर प्लान में यह 33% है। इसका मतलब है कि डायरेक्ट प्लान में निवेशक बाजार की गिरावट से ज्यादा डरते हैं और SIP जल्दी बंद कर देते हैं। सलाहकार की मौजूदगी निवेशकों को भावनात्मक फैसलों से बचाती है।

SIP बंद आसान : आज SIP शुरू करना जितना आसान है, उसे बंद करना उससे भी आसान हो गया है। एक-दो खराब महीनों के बाद बिना ज्यादा सोचे SIP रोक दी जाती है।

यह सुविधा शॉर्ट टर्म में राहत देती है, लेकिन लॉन्ग टर्म में भारी नुकसान कराती है।

SIP बीच में रोकने से कितना नुकसान?

SIP से दौलत बनाने का मूलमंत्र है कंपाउंडिंग। अगर आप बीच में SIP रोकते हैं, तो सबसे बड़ा नुकसान कंपाउंडिंग को ही होता है। अब मान लीजिए कोई निवेशक ₹5,000 महीने की SIP करता है और औसतन 12% रिटर्न मिलता है।

  • 5 साल में: ~₹4 लाख
  • 10 साल में: ~₹11 लाख
  • 15 साल में: ~₹23 लाख
  • 20 साल में: ~₹46 लाख

अगर कोई निवेशक 10 साल पर SIP रोक देता है, तो वह 20 साल के मुकाबले करीब 76% संपत्ति गंवा देता है। कंपाउंडिंग का असली जादू दूसरे दशक में दिखता है, लेकिन ज्यादातर निवेशक वहां तक पहुंचने से पहले ही बाहर निकल जाते हैं।

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बाजार के सबसे अच्छे दिन मिस हो जाना

इक्विटी रिटर्न कुछ चुनिंदा दिनों में बनते हैं। अगर निवेशक SIP रोक देता है, तो बाजार की तेज रिकवरी के सबसे अहम दिन मिस हो जाते हैं।

Sensex के आंकड़े दिखाते हैं कि 10 सबसे अच्छे दिन मिस करने पर रिटर्न आधे से भी कम हो सकता है। 30 सबसे अच्छे दिन मिस करने पर पूरा रिटर्न खत्म हो सकता है। इसका मतलब साफ है कि SIP इसलिए फेल नहीं होती क्योंकि बाजार रिटर्न नहीं देता। SIP इसलिए फेल होती है क्योंकि निवेशक उसे बीच में छोड़ देता है।

सबसे ज्यादा पैसा वही बनता है जब निवेश जारी रखना सबसे ज्यादा मुश्किल लगता है। जो निवेशक अस्थायी सुकून के लिए SIP रोक देते हैं, वे लंबे समय में स्थायी नुकसान उठाते हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।



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