
Paytm Shares: दिग्गज फिनटेक प्लेटफॉर्म पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस (One97 Communications) में घरेलू म्यूचुअल फंडों ने अपनी हिस्सेदारी हल्की की है। दिसंबर 2025 तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न से इसका खुलासा हुआ है। करीब चार साल पहले नवंबर 2021 में लिस्ट होने के बाद से यह पहली बार है, जब म्यूचुअल फंडों ने पेटीएम में अपनी हिस्सेदारी हल्की की है। इससे पहले म्यूचूअल फंड्स अपनी होल्डिंग कंपनी में लगातार बढ़ा रहे थे। इसका असर अब स्टॉक मार्केट खुलने पर दिख सकता है। एक कारोबारी दिन पहले 14 जनवरी को बीएसई पर यह 2.44% की बढ़त के साथ ₹1312.75 पर बंद हुआ था।
Paytm में कितनी रह गई Mutual Funds की हिस्सेदारी?
दिसंबर 2025 तिमाही के आखिरी में देश के म्यूचुअल फंड्स की पेटीएम में हिस्सेदारी घटकर 14.96% पर आ गई। सितंबर 2025 तिमाही के आखिरी में यह आंकड़ा 16.25% पर था। सितंबर तिमाही में पेटीएम में मोतीलाल ओसवाल म्यूचुअल फंड, निप्पन इंडिया म्यूचुअल फंड, मिरे एसेट म्यूचुअल फंड और बंधन म्यूचुअल फंड की अच्छी-खासी हिस्सेदारी थी लेकिन अब इनमें से सभी ने अपनी हिस्सेदारी हल्की की लेकिन बंधन म्यूचुअल फंड का शेयरहोल्डिंग पैटर्न में नाम ही नहीं दिख रहा है। बता दें कि 1% से कम होल्डिंग वाले शेयरहोल्डर्स के नाम का खुलासा कंपनियों को करना अनिवार्य नहीं है। इसका मतलब हुआ कि बंधन म्यूचुअल फंड ने पेटीएम में या तो पूरी होल्डिंग बेच दी है, या अब यह 1% से भी कम हो गई है।
अब रिटेल शेयरहोल्डर्स की बात करें तो उन्होंने लगातार बिकवाली जारी रखी और अक्टूबर-दिसंबर 2025 लगातार सातवीं तिमाही ऐसी रही, जब ₹2 लाख तक के निवेश वाले यानी खुदरा निवेशकों ने पेटीएम के शेयर बेचे हैं। कंपनी में अब उनकी हिस्सेदारी सितंबर 2023 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गई। खुदरा निवेशक जून 2024 तिमाही से अपनी हिस्सेदारी हल्की कर रहे हैं। बता दें कि कंपनी में 100% पब्लिक शेयरहोल्डर्स हैं।
अब तक कैसा रहा शेयरों का सफर?
पेटीएम के शेयरों की करीब चार साल पहले 18 नवंबर 2021 को घरेलू स्टॉक मार्केट में एंट्री हुई थी। इसके ₹18300 करोड़ के आईपीओ के तहत आईपीओ निवेशकों को ₹2150 के भाव पर शेयर जारी हुए थे लेकिन इस भाव तक यह काफी पहुंच ही नहीं पाया। करीब दो साल पहले 9 मई 2024 को यह ₹310.00 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर था जिससे काफी ऊपर आ चुका है लेकिन अभी भी यह इश्यू प्राइस से काफी नीचे है। इसके आईपीओ को 1.89 गुना बोली मिली थी लेकिन इसमें NII (नॉन-इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स) का हिस्सा पूरा भर भी नहीं पाया था। इसके आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का हिस्सा 2.79 गुना, एनआईआई का हिस्सा 0.24 गुना और खुदरा निवेशकों का आरक्षित हिस्सा 1.66 गुना भरा था।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।