
New Labour Code Cost on IT Companies: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस (Infosys) और एचसीएलटेक (HCLTech) जैसी आईटी कंपनियों को नए लेबर कोड के लागू होने से ₹4373 करोड़ का झटका लगा। इसके चलते चालू वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही अक्टूबर-दिसंबर 2025 में देश की तीन बड़ी आईटी कंपनियों के मुनाफे में दोहरे अंकों की तेज गिरावट दिखी। 14 जनवरी को इंफोसिस ने दिसंबर तिमाही के नतीजे जारी किए जिसमें सामने आया कि नए लेबर कोड के चलते दिसंबर तिमाही में इसे ₹1,289 करोड़ का एक्सपेश्नल शॉक लगा। वहीं 12 जनवरी को टीसीएस ने दिसंबर 2025 तिमाही में ₹2128 करोड़ और एचसीएलटेक ने ₹956 करोड़ के एक्सेप्शनल एक्सपेंस की जानकारी दी।
अब मार्जिन की बात करें तो नए लेबर कोर्स का इन कंपनियों के मार्जिन पर मिला-जुला असर नहीं पड़ा। नए लेबर कोड से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद टीसीएस तिमाही आधार पर 25.2% के ऑपरेटिंग मार्जिन को बनाए रखने में कामयाब रही। हालांकि इंफोसिस की ऑपरेटिंग मार्जिन ग्रोथ बढ़कर 18.6% पर पहुंच गई जबकि इंफोसिस की ऑपरेटिंग मार्जिन तिमाही आधार पर 21% से बढ़कर 18.4% पर पहुंच गई। इंफोसिस का कहना है कि अगर नए लेबर कोड्स से जुड़ी कॉस्ट न होती तो यह मार्जिन 21.2% होता।
क्या हैं नए लेबर कोड्स और क्या कहना है कंपनियों का?
नए लेबर कोड्स नवंबर 2025 में लागू हुए थे। इसमें बेहतर सैलरी, सेफ्टी, सोशल सिक्योरिटी और वेलफेयर को लेकर कई बदलाव पेश किए गए। आईटी/आईटीईएस सेक्टर के लिए चार नए लेबर कोड के तहत फिक्स्ड-टर्म एंप्लॉयमेंट के जरिए गारंटेड सोशल सिक्योरिटी बेनेफिट्स, अनिवार्य निकुक्ति पत्र, हायर बेसिक पे और तय वर्क ऑवर्स तय किए हैं। इसके अलावा आईटी कंपनियों को महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की सुविधा देने को कहा गया है, ताकि उन्हें अधिक सैलारी कमाने का मौका मिल सके।
टीसीएस के मुताबिक नए लेबर कोड्स को लेकर जो ₹2128 करोड़ खर्च हुए, उसमें से ₹1800 करोड़ ग्रेच्यूटी और करीब ₹300 करोड़ लीव लायबिलिटी से एडजस्ट करने में खर्च हुए। टीसीएस के सीएफओ समीर सेकसरिया ने पोस्ट-अर्निंग्स एनालिस्ट कॉल में कहा कि यह खर्च आगे भी बना रहेगा लेकिन इसका प्रभाव बहुत अधिक नहीं होगा और करीब 10-15 बेसिस प्वाइंट्स के दायरे में रहेगा। उनका कहना है कि जब नियमों को लेकर और स्पष्टता नहीं आती, किसी अतिरिक्त लागत की उम्मीद नहीं है।
इंफोसिस के सीएफओ जयेश संघराजका का भी कहना है कि नए लेबर कोड्स के चलते सालाना आधार पर करीब 15 बेसिस प्वाइंट्स का नियमित असर पड़ेगा। एचसीएलटेक का कहना है कि नए लेबर कोड्स से एडजस्टमेंट के लिए कंपनी को करीब $10.9 करोड़ का झटका लगा। एचसीएलटेक के सीईओ सी विजयकुमार ने अर्निंग्स कॉन्फ्रेंस में कहा कि आने वाले समय में इसके चलते बहुत कम असर पड़ेगा और यह लगभग 10-20 बेसिस प्वाइंट्स के दायरे में हो सकता है।
क्या कहना है ब्रोकरेजेज का?
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज का मानना है कि नए लेबर कोड के चलते दिसंबर 2025 तिमाही में जो खर्च बढ़ा, वह एक बार का नहीं है बल्कि आईटी कंपनियों के मार्जिन पर आगे दबाव दिख सकता है। इसके चलते सैलरी हाइक कम हो सकती है। नए लेबर कोड के मुताबिक एंप्लॉयीज की सैलरी उनके कुल सीटीसी का कम से कम 50% होना चाहिए। इसके अलावा पीएफ और ग्रेच्यूटी जैसे बेनेफिट्स का कैलकुलेशन सैलरी के आधार पर किया जाएगा। इससे आईटी कंपनियों के लिए रिकरिंग एंप्लॉयी कॉस्ट बढ़ सकती है और एकमुश्त तगड़ा वित्तीय असर दिख सकता है।
एक औऱ ब्रोकरेज फर्म जेफरीज का कहना है कि नए लेबर कोड्स रेवेन्यू की सुस्त ग्रोथ और एआई वाले बिजनेस मिक्स में बदलाव के साथ-साथ वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2028 में एच-1बी वीजा नियमों में बदलाव से ऑनसाइड हाई वेज हाइक के चलते मार्जिन पर दबाव और बढ़ाएगी। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि अगर भारतीय एंप्लॉयीज की लागत 2% बढ़ती है तो इससे वित्त वर्ष 2027 में आईटी कंपनियों की कमाई के अनुमानों में 2-4% की कमी आ सकती है। ऐसे में कंपनियां इसके असर को कम करने के लिए सैलरी हाइक की रफ्तार सुस्त कर सकती है, खासतौर से सीनियर लेवल पर।