
Market Expectations from Budget 2026: अगले वित्त वर्ष 2027 के बजट का काउंटडाइन शुरू हो चुका है। बाजार को उम्मीद है कि पीएम सूर्य घर रूफटॉप सोलर, ग्रीन एनर्जी कोरिडोर, डिस्कॉम्स के लिए आरडीएसएस, एसएमआर न्यूक्लियर मिशन और पंप्ड स्टोरेज सपोर्ट जैसी योजनाएं जारी रहेंगी। साथ ही बाजार को उम्मीद है कि सरकार का फोकस रिन्यूएबल्स, ग्रिड विस्तार और स्टोरेज पर बना रहेगा। हालांकि नए आवंटन सीमित रह सकते हैं या नियर टर्म में बाजार पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। मार्केट का यह भी मानना है कि बजट मार्केट में जोश भर दे, नियर टर्म में तो इसकी संभावना कम ही दिख रही है लेकिन यह न्यूक्लियर पावर, रिन्यूएबल्स, स्टोरेज और ट्रांसमिशन के लिए लंबे समय की दिशा तय करेगी।
Budget 2026 से ये हैं उम्मीदें और रहेंगी ये चुनौतियां
पहले बजट से उम्मीदों की बात करें तो मार्केट का मानना है कि बजट में रिन्यूएबल्स पर फोकस बना रहेगा जिसे सोलर और रूफटॉप कैपेसिटी एडीशंस से सपोर्ट मिलेगा। साथ ही निजी भागीदारी और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर्स से न्यूक्लियर पावर का महत्व बढ़ेगा। साथ ही एनर्जी स्टोरेज (बैट्री और पंप्ड हाइड्रो) प्राथमिकता के तौर पर उभर सकता है। अब चुनौतियों की बात करें तो न्यूक्लियर और स्टोरेज प्रोजेक्ट्स में ऊंची लागत और आउटपुट को लेकर लंबा इंतजार, रिन्यूएबल से लैस राज्यों में ट्रांसमिशन से जुड़ी दिक्कतों और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों पर जारी वित्तीय दबाव जैसी दिक्कतें भी हैं।
डेलॉयट इंडिया के पार्टनर अश्विन जैकब का कहना है कि प्रोजेक्ट व्यावहारिक हों, इसके लिए रिन्यूएबल कंपनियों को ग्रुप टैक्स कंसालिडेशन, रिन्यूएबल कंपोनेंट्स पर कम जीएसटी और न्यूक्लियर स्टार्टअप्स को डायरेक्ट टैक्स इंसेंटिव के साथ-साथ बैट्री एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स के लिए डेप्रिसिएसन और आरएंडडी क्रेडिट्स, जीएसटी रेशनलाइजेशन और टैक्स बेनेफिट्स जैसी मांग है। मिरे एसेट शेयरखान के अंकित सोनी को उम्मीद है कि बजट में पावर सेक्टर को स्थिर रखने पर फोकस रहेगा जिसमें ग्रिड विस्तार, ट्रांसमिशन, एनर्जी स्टोरेज और मॉडर्नाइजेशन पर जोर रहेगा। साथ ही रूफटॉप सोलर भी फोकस रहेगा।
अंकित सोनी का मानना है कि बड़े बजट की संभावना कम है। जैसे कि रूफटॉप सोलर से जुड़ी पीएम कुसुम योजना में पिछले साल कोई बड़ा इजाफा नहीं हुआ था बल्कि इंस्टॉलेशन बढ़ाने पर जोर रहा। पिछले बजट में रूफटॉप सोलर योजना को करीब ₹20,000 करोड़ मिले थे। इस बार इसमें थोड़ी और बढ़ोतरी हो सकती है। पावर सेक्टर को लेकर उनका मानना है कि इसे ₹45 हजार-₹60 हजार करोड़ मिलने की उम्मीद है जिसमें मुख्य फोकस बैट्री एनर्जी स्टोरेज पर रह सकता है। साथ ही हाइड्रो, एसएमआर और ग्रीन एनर्जी पर भी जोर रहेगा।
एलारा सिक्योरिटीज के रूपेश सांखे को उम्मीद है कि इस बजट से प्योर-प्ले रिन्यूएबल और न्यूक्लियर कंपनियों को अधिक फायदा मिल सकता है। उन्होंने आगे कहा कि HVDC ट्रांसमिशन कंपनियों को भी मजबूत मांग और बेहतर एसेट यूटिलाइजेशन देखने को मिल सकता है, जबकि REC और PFC जैसी फाइनेंसिंग एंटिटीज को बढ़ी हुई फंडिंग जरूरतों से फायदा मिल सकता है।
इन स्टॉक्स पर रहेगी नजरें
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट से नियर टर्म में मार्केट में जोश आने की उम्मीद कम है क्योंकि न्यूक्लियर और स्टोरेज प्रोजेक्ट्स में काम पूरा होने यानी आउटपुट आने में लंबा समय लगता है। रूपेश सांखे के मुताबिक आमतौर पर बजट पर मार्केट तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देता है क्योंकि अधिकतर ऐलान लॉन्ग टर्म के होते हैं। न्यूक्लियर और हाइड्रो प्रोजेक्ट्स में काम पूरा होने पर 5-7 साल का समय लगता है तो इनसे जुड़े ऐलान तत्काल फायदा देने के बजाय लंबे समय के लिए दिशा दिखाते हैं। उनका मानना है कि सिर्फ कोई बड़ा पॉजिटिव सरप्राइज ही नियर टर्म में शेयरों में तेज हलचल दिखा सकती है। कुल मिलाकर एक्सपर्ट्स का मानना है कि बिजली की मांग मजबूत बनी हुई है जिसके चलते अदाणी पावर, जेएसब्ल्यू एनर्जी और टोरेंट पावर में रिच वैल्यूएशन के बावजूद शॉर्ट टर्म में अच्छा रुझान दिख सकता है। एक्सपर्ट्स की नजरें एनटीपीसी, पीएफसी और आरईसी जैसे स्टॉक्स पर भी हैं।
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