
साल 2025 शेयरों के निवेशकों के लिए बहुत अच्छा नहीं रहा। 2026 में भी मार्केट पर दबाव दिख रहा है। ऐसे में बाजार की नजरें वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के यूनियन बजट पर लगी हैं। वह 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वित्तमंत्री सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) को हटाती या खत्म करती हैं और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस (एसटीसीजी) टैक्स में कमी करती हैं तो इससे शेयर बाजार को पंख लग सकते हैं।
कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार एसटीटी को बनाए रखती है तो उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) टैक्स को पूरी तरह से हटा देना चाहिए। यूनियन बजट 2024 में सरकार ने एसटीटी काफी बढ़ा दिया था। ऑप्शन पर एसटीटी 0.0625 फीसदी से बढ़ाकर 0.1 फीसदी कर दिया था। फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट पर एसटीटी 0.0125 फीसदी से बढ़ाकर 0.02 फीसदी कर दिया था।
बाजार के कुछ जानकारों का कहना है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को कैश मार्केट में एसटीटी पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए। इक्विटी डिलीवरी ट्रांजेक्शन के बाय और सेल साइड पर एसटीटी 0.1 फीसदी लगता है। इसका मतलब है कि प्रति 1,00,000 रुपये पर यह 100 रुपये लगता है। एसटीटी की वजह से ट्रेडर्स के रिटर्न पर खराब असर पड़ता है।
सरकार ने यूनियन बजट 2024 में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में भी बड़ा बदलाव किया था। शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया गया था। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस (एसटीसीजी) 15 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया गया था। ब्रोकर्स, इनवेस्टर्स, एएमसी और मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने इसे नापसंद किया था। उनका मानना था कि इससे लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स को नुकसान होगा।
Aikyam Capital Group की हेड इंस्टीट्यूशनल सेल्स ट्रेडिंग वनिता सालियान बांगेरा ने कहा कि देश में घरेलू इक्विटी ईकोसिस्टम मजबूत हुआ है। हर महीने SIP से होने वाला औसत मंथली निवेश FY के 13,000 करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में 28,202 करोड़ रुपये हो गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि विदेशी फंडों की बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों ने बाजार पर भरोसा बनाए रखा है।
उन्होंने कहा, “अगर सरकार एलटीसीजी टैक्स को तर्कसंगत बनाती है तो इससे लंबी अवधि में कैपिटल फॉर्मेशन को बढ़ावा मिलेगा। टैक्स बाद रिटर्न थोड़ा भी बदने से लंबी अवधि में बड़ा असर पड़ता है। इससे फाइनेंशियल एसेट्स में परिवारों की हिस्सेदारी बढ़ती है।” हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार टैक्स रेट्स में बदलाव नहीं करेगी। जिराफ के को-फाउंडर सौरभ घोष ने कहा है कि डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है।