
सोलर इंडस्ट्रीज अपने बिजनेस का डायवर्सिफिकेशन कर रही है। मुख्य रूप से यह माइनिंग से जुड़ी एक्सप्लोसिव कंपनी रही है। इसने डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस बढ़ाया है। नए बिजनेस की ग्रोथ से कंपनी की अर्निग्स में इम्प्रूवमेंट दिखा है। डिफेंस रेवेन्यू बढ़ने और विदेश में ऑपरेशन के विस्तार से कंपनी की अर्निंग्स में उतारचढ़ाव घटेगा। कैश फ्लो भी बढ़ेगा। कंपनी के शेयर में बीते एक साल में 46 फीसदी से ज्यादा उछाल आया है।
इंडस्ट्रियल एक्सप्लोसिव बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी
Solar Industries इंडस्ट्रियल एक्सप्लोसिव बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी है। इसकी घरेलू बाजार में 25-30 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है। पैकेज्ड एक्सप्लोसिव में यह दुनिया की सबसे ज्यादा क्षमता वाली कंपनियों में से एक है। इसका डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क व्यापक है। यह ऑन-साइट ब्लास्ट सॉल्यूशंस ऑफर करती है। इस वजह से कस्टमर्स के साथ इसके रिश्तें बहुत स्ट्रॉन्ग है। इंडिया में एक्सप्लोसिव के लिए माइनिंग सबसे बड़ा मार्केट है। एक्सप्लोसिव के कंजम्प्शन में इसकी हिस्सेदारी करीब 80 फीसदी है।
प्रोडक्ट्स के लिए स्ट्रॉन्ग डिमांड बने रहने की उम्मीद
सोलर इंडस्ट्रीज के रेवेन्यू में कोल इंडिया (CIL) और उसकी सब्सिडियरी की करीब करीब 15-18 फीसदी हिस्सेदारी रही है। शॉर्ट टर्म में मुश्किल के बावजूद कंपनी के प्रोडक्ट्स के लिए स्ट्रॉन्ग डिमांड बने रहने की उम्मीद है। कोल प्रोडक्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस और रिप्लेसमेंट डिमांड से कंपनी की ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। मीडियम टर्म में कंपनी के घरेलू एक्सप्लोसिव बिजनेस की ग्रोथ स्टेबल रहने की उम्मीद है। इससे कंपनी का कैश जेनरेशन भी स्टेबल रहेगा।
कंपनी के डिफेंस बिजनेस का शानदार प्रदर्शन
कंपनी ने एक दशक पहले डिफेंस सेक्टर में एंट्री ली थी। अब यह बिजनेस अच्छे लेवल पर पहुंच गया है। कंपनी का डिफेंस पोर्टफोलियो काफी बड़ा हो गया है। इसमें हाई-एनर्जी मैटेरियल्स, प्रोपेलेंट्स, वारहेड्स, एम्युनिशन, फ्यूजेज, रॉकेट और मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। यह ऐसा पोर्टफोलियो है, जिसे डेवलप करना किसी दूसरी कंपनी के लिए आसान नहीं है। इसकी वजह यह है कि इसमें रेगुलेटरी प्रोसेस, टेक्नोलॉजी और क्वालिफिकेशन बैरियर्स शामिल हैं।
16,600 करोड़ रुपये की ऑर्डर बुक
सोलर इंडस्ट्रीज की डिफेंस ऑर्डर बुक करीब 16,600 करोड़ रुपये की है। इस वजह से कंपनी के रेवेन्यू को लेकर तस्वीर साफ है। कंपनी के पास पिनाका रॉकेट सिस्टम्स जैसे प्रोग्राम के ऑर्डर हैं। इस सेगमेंट में एक्सपोर्ट के मौके भी बढ़ रहे हैं। अभी कंपनी के रेवेन्यू में डिफेंस की हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि FY26 के अंत तक यह हिस्सेदारी बढ़कर 30 फीसदी तक पहुंच जाएगी। मैनेजमेंट ने FY26 में 10,000 करोड़ रुपये के कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू का टारगेट रखा है। इसमें डिफेंस की हिस्सेदारी करीब 3,000 करोड़ रुपये होगी।
आगे कैसा रह सकता है प्रदर्शन?
अभी कंपनी के शेयरों में FY28 की अनुमानित अर्निंग्स के 45 गुना पर ट्रेडिंग हो रही है। रेगुलेटेड डोमेस्टिक एक्सप्लोसिव मार्केट में लीडरशिप पोजीशन, डिफेंस के बढ़ते पोर्टफोलियो और विदेश में कारोबार के विस्तार को देखते हुए यह ज्यादा नहीं लगता है। कंपनी की आर्डर बुक इतनी बड़ी है कि अगले साल तक इसकी अर्निंग्स को लेकर तस्वीर साफ है। आने वाले समय में कंपनी के बिजनेस में डिफेंस और एक्सपोर्ट्स की हिस्सेदारी बढ़ने वाली है। इससे कंपनी के एक डायवर्सिफायड डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी की पूरी उम्मीद है।