
इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में दिसंबर 2025 में निवेश मासिक आधार पर 6 प्रतिशत घटकर 28,054 करोड़ रुपये रह गया। नवंबर में निवेश का आंकड़ा 29,911 करोड़ रुपये था। वहीं अक्टूबर में 24,690 करोड़ रुपये से अधिक रहा था। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) ने इस बारे में शुक्रवार को आंकड़े जारी किए। इक्विटी में निवेश में कमी के साथ-साथ म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के ओवरऑल एसेट बेस में मामूली गिरावट दर्ज की गई। इससे एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का आंकड़ा नवंबर के 80.80 लाख करोड़ रुपये से घटकर दिसंबर में 80.23 लाख करोड़ रुपये रह गया।
AMFI के आंकड़ों के अनुसार, म्यूचुअल फंड उद्योग ने दिसंबर में 66,591 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी देखी। इसका मुख्य कारण डेट स्कीम्स से भारी मात्रा में निकासी थी, जबकि इक्विटी और गोल्ड फंड निवेशकों को आकर्षित करते रहे। SIP के जरिए रिटेल पार्टिसिपेशन दिसंबर में 31,000 करोड़ रुपये के अब तक के सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गया। नवंबर में यह आंकड़ा 29,445 करोड़ रुपये था।
किस तरह के फंड में कितना निवेश
दिसंबर 2025 के दौरान डिविडेंड यील्ड और इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम्स (ELSS) फंड्स के अलावा अधिकतर सब-कैटेगरीज में सकारात्मक रुझान देखने को मिला। फ्लेक्सी-कैप फंड सबसे पसंदीदा विकल्प बने रहे। इसमें 10,019 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ, जो नवंबर के 8,135 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके बाद मिड-कैप फंड में 4,176 करोड़ रुपये, लार्ज एंड मिड-कैप फंड में 4,094 करोड़ रुपये और स्मॉल-कैप फंड में 3,824 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। लार्ज-कैप फंड में 1,567 करोड़ रुपये का निवेश आया।
इसके उलट ELSS में 718 करोड़ रुपये और डिविडेंड यील्ड फंड 254 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई। दूसरी ओर डेट म्यूचुअल फंड्स ने दिसंबर में 1.32 लाख करोड़ रुपये की भारी निकासी देखी। नवंबर में शुद्ध निकासी 25,692 करोड़ रुपये की रही थी।
ETFs की स्थिति
इसके अलावा निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों में भी नए सिरे से रुचि दिखाई। गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETFs) में शुद्ध निवेश दिसंबर में बढ़कर 11,647 करोड़ रुपये हो गया, जो नवंबर के 3,742 करोड़ रुपये और अक्टूबर के 7,743 करोड़ रुपये से काफी अधिक है। इक्विटी और गोल्ड ETFs के अलावा हाइब्रिड फंड्स ने दिसंबर में 10,756 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया।