
Share Market Down: भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार 8 जनवरी को तेज उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिला। शुरुआती तेजी के बाद बाजार में बिकवाली हावी हो गई और बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और Nifty लगातार पांचवें दिन गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। सेंसेक्स दिन के उच्च स्तर से करीब 500 अंकों तक टूट गया। वहीं निफ्टी एक बार फिर 25,800 के नीचे फिसल गया। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कमजोर ग्लोबल संकेतों से बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव दिखा। ग्लोबल ट्रेड से जुड़ी अनिश्चितताओं के चलते भी निवेशक जोखिम लेने से बचते नजर आएय़
सुबह 11.15 बजे के करीब, बीएसई सेंसेक्स 271.88 अंक या 0.32 फीसदी टूटकर 83,909.08 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी 80.25 अंक 0.31% गिरकर 25,796.60 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
शेयर बाजार में आज की इस गिरावट के पीछे 5 बड़े कारण रहे-
1. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली का रहा। FIIs ने गुरुवार को भारतीय शेयरों में करीब 3,367 करोड़ रुपये की बिकवाली की। वे लगातार पिछले चार दिनों से भारतीय बाजार से पैसे निकाल रहे हैं। जनवरी महीने में अब तक विदेशी निवेशक करीब 8,017.51 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं।
2. अमेरिका में टैरिफ पर फैसले से पहले सतर्कता
निवेशकों की नजर अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के उस अहम फैसले पर टिकी हुई है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ की वैधता पर फैसला आना है। अगर अदालत इन टैरिफ को अवैध करार देती है, तो अमेरिकी सरकार को इंपोर्टरों को करीब 150 अरब डॉलर तक की रकम लौटानी पड़ सकती है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ वीके विजयकुमार के मुताबिक, शेयर बाजार की चाल इस फैसले के नतीजों पर टिकी हुई है। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि कोर्ट का फैसला ट्रंप के खिलाफ जाएगा। अगर ट्रंप टैरिफ को कोर्ट पूरी तरह से अवैध घोषित कर देता है, तो भारत जैसे देशों के लिए यह अच्छी खबर हो सकती है क्योंकि 50% टैरिफ के साथ भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में से एक है। हालांकि देखना होगा कि कोर्ट टैरिफ को कुछ हद तक कम करेगा या पूरी तरह से गैर-कानूनी घोषित करेगा।
3. टैरिफ को लेकर नई चिंताएं
बीते कुछ दिनों में बाजार पर टैरिफ से जुड़ी आशंकाएं फिर से हावी हो गई हैं। ट्रंप की ओर से संकेत दिया गया है कि रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर और सख्त टैरिफ लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा, रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने वाले एक नए प्रतिबंध विधेयक को भी मंजूरी मिलने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है।
इन घटनाओं के चलते पिछले चार कारोबारी दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी में क्रमशः करीब 1.8 फीसदी और 1.7 फीसदी की गिरावट देखी जा चुकी है।
4. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त भी भारतीय शेयर बाजार के लिए नेगेटिव रही। ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 0.53 फीसदी चढ़कर 62.32 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए ऊंची तेल की कीमतें महंगाई और चालू खाते के घाटे का जोखिम बढ़ाती हैं, जिसका सीधा असर शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ता है।
5. रुपये में कमजोरी
शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया भी दबाव में रहा और डॉलर के मुकाबले 7 पैसे टूटकर 89.97 के स्तर तक फिसल गया। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये पर दबाव बनाए रखा। फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, अमेरिकी टैरिफ को लेकर अनिश्चितता और कमजोर घरेलू शेयर बाजार के चलते विदेशी निवेशक सतर्क बने हुए हैं, जिससे रुपये पर दबाव जारी है।
टेक्निकल एक्सपर्ट्स का क्या है कहना?
HDFC Securities में प्राइम रिसर्च के हेड देवर्ष वकील के मुताबिक, निफ्टी ने कुछ अहम टेक्निकल सपोर्ट लेवल तोड़ दिए हैं, जिससे बाजार की कमजोरी बढ़ी है। उन्होंने बताया कि निफ्टी अपने 50-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज, जो फिलहाल 25,911 के आसपास है, से नीचे फिसल गया है। इसके अलावा, डेली चार्ट पर बना 25,878 का पिछला सपोर्ट लेवल भी टूट चुका है। अब अगला मजबूत सपोर्ट 25,700 के पास नजर आ रहा है, जो दिसंबर 2025 के निचले स्तर के आसपास है। वहीं ऊपर की तरफ 26,000 से 26,050 का दायरा फिलहाल मजबूत रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर सकता है।
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