
Stock Crash: अमेरिकी बाजार में अपने माल एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के शेयरों में गुरुवार 8 जनवरी को अफरा-तफरी का माहौल रहा। टेक्सटाइल सेक्टर की प्रमुख एक्सपोर्ट कंपनी गोकलदास एक्सपोर्ट्स (Gokaldas Exports) के शेयर एक झटके में 13 फीसदी तक टूट गए, जो पिछले 6 साल में इस शेयर में आई सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले इस कंपनी के शेयर में इतनी बड़ी गिरावट कोविड क्रैश के समय, अप्रैल 2020 में दिखी थी। लगातार दबाव के चलते अब यह शेयर गिरकर अपने पिछले 29 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
पिछले छह में से पांच दिन गोकलदास एक्सपोर्ट्स के शेयर लाल निशान में रहे हैं। मौजूदा गिरावट के साथ यह शेयर अब अपने 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर 1,144 रुपये से करीब 47% तक नीचे आ चुका है। वहीं दिसंबर 2024 में बनाए 1,262 रुपये के रिकॉर्ड हाई से यह शेयर अब 53% टूट चुका है।
पूरे एक्सपोर्ट सेक्टर पर दबाव
अमेरिका से जुड़े जोखिम बढ़ा रहे चिंता
बाजार जानकारों के मुताबिक, अमेरिका के साथ संभावित ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता इस बिकवाली की बड़ी वजह है। नए साल की शुरुआत वह समय होती है जब एक्सपोर्टर पूरे साल के लिए बड़े ऑर्डर फाइनल करते हैं। लेकिन इस बार अमेरिकी टैरिफ को लेकर स्पष्टता न होने से निवेशक और कारोबारी दोनों सतर्क नजर आ रहे हैं। फिलहाल भारतीय सामानों पर अमेरिका में 50% तक टैरिफ लागू है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की एक बड़ी जूता बनाने वाली कंपनी ने बताया है कि अमेरिकी बाजार से बड़े ऑर्डर पाने के लिए आमतौर पर 15 जनवरी आखिरी तारीख होती है। इसके बाद अमेरिका से बड़े ऑर्डर पक्का करना मुश्किल हो जाता है। अगर इस तारीख तक ऑर्डर मिल जाते हैं, तो गर्मियों और ऑटम सीजन के लिए कंपनियों की कमाई स्थिर बनी रहती है।
राजनैतिक बयान भी बढ़ा रहे दबाव
इसके अलावा अमेरिका के सीनेटर लिंडसे ग्राहम के हालिया बयान ने भी चिंता बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई के लिए रूस सैंक्शंस बिल को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इस प्रस्तावित कानून के तहत ऐसे देशों पर 500% तक टैरिफ लगाए जाने की संभावना है, हालांकि इसके लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। भारत जैसे देशों के लिए यह बयान जोखिम की आशंका को और गहरा करता है।
इन कंपनियों की अमेरिका से होती है बड़ी कमाई
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि Gokaldas, Pearl Global और Welspun Living जैसी कंपनियों की 50 से 70 फीसदी तक की कमाई अमेरिकी बाजार से आती है। वहीं श्रिम्प (झींगा) फीड बनाने वाली Avanti और Apex जैसी कंपनियों को भी लगभग आधी से दो-तिहाई कमाई अमेरिका से मिलती है। हालांकि, इंडस्ट्री एसोसिएशनों का कहना है कि इन कंपनियों और एक्सपोर्टर्स ने यूरोपीय यूनियन जैसे दूसरे बाजारों में भी अपने एक्सपोर्ट बढ़ा लिए हैं, जिससे अमेरिका पर निर्भरता कुछ हद तक कम हुई है।
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