Meesho ने डुबो दिए ₹40000 करोड़, लगातार दूसरे दिन लोअर सर्किट, इन दो वजहों से घबराए निवेशक – meesho shares fall 5 percent 2nd day in a row after lock in ends and gm-business resigns rupees 40000 crore wiped off from m-cap since dec high



Meesho Share Price: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो के शेयरों में आज लगातार दूसरे दिन लोअर सर्किट लगा। एक कारोबारी दिन पहले इसके शेयरों में बिकवाली की वजह तो इसके ₹2000 करोड़ से अधिक की वैल्यू वाले शेयरों का लॉक-इन खत्म होना था तो आज एक और वजह तैयार हो गई- जनरल मैनेजर (बिजनेस) मेघा अग्रवाल का इस्तीफा। मीशो ने एक्सचेंज फाइलिंग में खुलासा किया है कि इसकी जनरल मैनेजर (बिजनेस) और सीनियर मैनेजमेंट पर्सन मेघा अग्रवाल ने इस्तीफा दिया है। फिलहाल बीएसई पर यह 5% के लोअर सर्किट ₹164.55 पर बना हुआ है। इसके साथ ही यह एक महीने से भी समय में रिकॉर्ड हाई से 35% से अधिक टूट गया और निवेशकों के ₹40 हजार से अधिक डूब गए।

इसके ₹5,421 करोड़ के आईपीओ के तहत निवेशकों को ₹111 के भाव पर शेयर जारी हुए थे जिसकी स्टॉक मार्केट में करीब 46% प्रीमियम पर एंट्री हुई थी। लिस्टिंग के कुछ ही दिनों बाद 18 दिसंबर को यह ₹254.65 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। इसके कुछ ही दिनों पहले 12 दिसंबर 2025 को यह लिस्टिंग के बाद के रिकॉर्ड निचले स्तर ₹153.95 तक आ गया था।

Meesho के कितने शेयरों का लॉक-इन हुआ खत्म?

नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च के मुताबिक मीशो के करीब 10.99 करोड़ शेयरों यानी करीब 2% आउटस्टैंडिंग इक्विटी का 1 महीने का लॉक-इन खत्म हुआ है। इसके चलते एक कारोबारी दिन पहले मीशो के शेयर 5% टूटकर लोअर सर्किट पर आ गए। वैसे बता दें कि शेयरों का लॉक-इन पीरियड खत्म होने का मतलब ये नहीं है कि शेयरहोल्डर्स इनकी बिक्री करने ही वाले हैं बल्कि इसका मतलब ये है कि लॉक-इन पीरियड खत्म होने के बाद इनके होल्डर्स मुनाफावसूली कर सकते हैं। जितने शेयरों का लॉक-इन खत्म हुआ है, 6 जनवरी को क्लोजिंग प्राइस ₹182.30 के हिसाब से उनकी वैल्यू करीब ₹2003 करोड़ है।

दो वजहों से आई मीशो में गिरावट

बोनांजा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मीशो ने अपनी लॉजिस्टिक्स एफिसिएंसी में काफी सुधार किया था और इसके प्रतिऑर्डर की लागत वित्त वर्ष 2023 में ₹55 से घटक वित्त वर्ष 2025 में ₹46 पर आ गया। अभिनव का कहना है कि यह सुधार इसके खुद के लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म वाल्मो (Valmo) को तैयार करने और डिलीवरी डेंसिटी में सुधार से आया। इसके अलावा कैश ऑन डिलीवरी ऑर्डर्स पहले के 90% से घटकर इस वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में 61% पर आ गया जिससे फेल डिलीवरी और लागत को कम करने में मदद मिली है। छोटे शहरों में वाल्मो तेजी से अपना विस्तार कर रही है। भारी सब्सिडी के बिना लॉजिस्टिक्स में सुधार करके वाल्मो ने ऑपरेटिंग रिस्क को कम किया और कैश फ्लो को मजबूत किया, जिससे बिजनेस अधिक कैपिटल एफिसिएंट हुआ और यह प्रॉफिटेबिलिटी के करीब पहुंच गई।

अभिनव का कहना है कि ऑपरेशनल लेवल पर इन सुधारों के बावजूद मीशो के शेयरों में हाल ही में काफी दबाव दिखा था। उनका कहना है कि आज के गिरावट की वजह तो इसके शेयरों के लिए लॉक-इन पीरियड खत्म होना है जिससे मार्केट में इसके शेयरों की सप्लाई बढ़ सकती है। इसके अलावा अन्य कंज्यूमर इंटरनेट और रिटेल पियर्स के मुकाबले मीशो के हाई वैल्यूएशन के चलते भी मुनाफावसूली ने दबाव बनाया।

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