
2026 में लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स में से किस पर दांव लगाना सबसे अच्छा रहेगा? इसका जवाब एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के मार्केट आउटलुक 2026 से मिलता है। इसके मुताबिक, वैल्यूएशन के लिहाज से देखा जाए तो मिडकैप और स्मॉलकैप के मुकाबले लार्जकैप स्टॉक्स अट्रैक्टिव दिख रहे हैं। बड़ी कंपनियों की अर्निंग्स की तस्वीर भी अपेक्षाकृत साफ लग रही है।
लार्जकैप को छोड़ बाकी मार्केट महंगा
इस रिपोर्ट में कहा गया है, “वैल्यूएशन के लिहाज से देखा जाए तो लार्जकैप के मुकाबले बाकी मार्केट महंगा लगता है। साल 2025 में निफ्टी का रिटर्न 12 फीसदी और सेंसेक्स का 10.5 फीसदी रहा। इसके मुकाबले Nifty Midcap 150 इंडेक्स का रिटर्न 6.2 फीसदी रहा। Nifty Smallcap 250 Index में 5.3 फीसदी गिरावट देखने को मिली। 2026 में भी स्थिति ज्यादा अलग नहीं दिख रही। लार्जकैप स्टॉक्स की लीडरशिप जारी रहने की उम्मीद है।”
मिडकैप-स्मॉलकैप में ज्यादा निवेश ठीक नहीं
इस रिपोर्ट में बाकी मार्केट में अच्छी रिटर्न की संभावनाओं का खारिज नहीं किया गया है। लेकिन, निवेशकों को मिडकैप और स्मॉलकैप में बहुत ज्यादा निवेश करने से सावधान किया गया है। हालांकि, मिड और स्मॉलकैप सेगमेंट के कुछ चुनिंदा पॉकेट्स में वैल्यू दिख सकती है। लेकिन, निवेशकों को मार्केट के मोमेंटम के पीछे भागने की जगह क्वालिटी और स्टॉक सेलेक्शन पर ध्यान देने की जरूरत है।
2025 नॉर्मलाइजेशन का साल रहा
2025 को इस रिपोर्ट में नॉर्मलाइजेशन का साल बताया गया है। बीते साल की शुरुआत शेयरो की हाई वैल्यूएशन के साथ हुई थी। इनवेस्टर्स की उम्मीदें काफी ज्यादा थीं। लेकिन, जनवरी और फरवरी में आई गिरावट के बाद मार्केट्स अपने फंडामेंटल्स के करीब पहुंच गए। मार्केट के प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट आई। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों की तो ज्यादा पिटाई हुई। इससे पिछले कुछ सालों में बने बुलबुले की हवा निकल गई।
उतारचढ़ाव के बावजूद डबल डिजिट रिटर्न
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के इनटर्नल फ्रेमवर्क में भी इक्विटीज को लेकर न्यूट्रल रुख दिखा है। इक्विटी में निवेश का रिकॉमेंडेशन बढ़कर करीब 60 फीसदी पहुंच गया है, जो साल 2025 की शुरुआत में 20 फीसदी था। इस बदलाव के पीछे वैल्यूशन का कंफर्ट है। यह ध्यान देने वाली बात है कि 2025 स्टॉक मार्केट्स के लिए उतार-चढ़ाव वाला साल रहा। इसके बावजूद साल के अंत में मार्केट का रिटर्न डबल डिजिट में रहा।
सरकार और RBI से मिला मार्केट को सहारा
2025 में लॉर्जकैप सूचकांकों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा। लेकिन, बाकी शेयरों को संघर्ष करना पड़ा। मार्केट को सरकार और आरबीआई से काफी सहारा मिला। सरकार ने इनकम टैक्स में टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी। जीएसटी के रेट्स घटाए गए। लेबर रिफॉर्म्स किया गया। उधर, आरबीआई ने रेपो रेट में 1.25 फीसदी की कमी की। इसका सेंटिमेंट पर पॉजिटिव असर पड़ा। टैक्स में राहत से लोगों की जेब में पैसे बचे। जीएसटी में कमी से डिमांड को बढ़ावा मिला।
2026 में अर्निंग्स ग्रोथ पर लगी हैं नजरें
2026 में नजरें दिसंबर तिमाही के कंपनियों के नतीजों पर लगी हैं। अगर कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ अच्छी रहती है तो इसका मार्केट पर अच्छा असर पड़ेगा। यूनियन बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर पर फोकस बनाए रखने और फिस्कल डेफिसिट में कमी लाने की सरकारी की कोशिशों से मार्केट के सेटिमेंट को मजबूत मिल सकता है। साल 2026 के दूसरे दिन ही निफ्टी ने सितंबर 2024 के अपने हाई को तोड़ दिया।