
कंपीटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने स्टील सेक्टर में बड़ी अनियमितता पकड़ी है। जांच में सामने आया है कि Tata Steel, JSW Steel और सरकारी कंपनी SAIL ने स्टील की बिक्री कीमतों को लेकर आपसी मिलीभगत की। इस मामले में 25 अन्य कंपनियां भी शामिल पाई गई हैं। समाचार एजेंसी Reuters ने एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।
56 सीनियर एग्जीक्यूटिव भी दोषी करार
CCI ने 2015 से 2023 के अलग-अलग दौर में कीमतों की मिलीभगत के मामले में 56 वरिष्ठ अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया है।
इनमें JSW Steel के मैनेजिंग डायरेक्टर सज्जन जिंदल, Tata Steel के CEO टी. वी. नरेंद्रन, और SAIL के चार पूर्व चेयरपर्सन शामिल हैं। यह जानकारी 6 अक्टूबर की CCI ऑर्डर में दी गई है, जिसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
कंपनियों और अधिकारियों की प्रतिक्रिया
JSW Steel ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया। वहीं Tata Steel, SAIL और संबंधित अधिकारियों ने Reuters की पूछताछ का जवाब नहीं दिया। CCI की ओर से भी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
2021 में शुरू हुई थी जांच
यह जांच भारत के स्टील सेक्टर से जुड़ी सबसे हाई-प्रोफाइल जांचों में से एक मानी जा रही है। इसकी शुरुआत 2021 में हुई थी, जब एक बिल्डर्स एसोसिएशन ने तमिलनाडु की एक राज्य अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि स्टील कंपनियां मिलकर सप्लाई सीमित कर रही हैं और कीमतें बढ़ा रही हैं।
31 कंपनियां और कई इंडस्ट्री बॉडीज शामिल
बाद में जांच का दायरा बढ़ाकर 31 कंपनियों, कई इंडस्ट्री बॉडीज और दर्जनों अधिकारियों तक कर दिया गया। CCI के नियमों के मुताबिक, कार्टेल से जुड़े मामलों की पूरी जानकारी तब तक सार्वजनिक नहीं की जाती, जब तक कार्यवाही पूरी नहीं हो जाती। Reuters ने 2022 में यह भी रिपोर्ट किया था कि जांच के तहत CCI ने कुछ स्टील कंपनियों पर छापेमारी की थी।
CCI की ऑर्डर में क्या कहा गया
अक्टूबर की ऑर्डर में CCI ने कहा, ‘पार्टियों का आचरण भारतीय प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन करता पाया गया है’ और ‘कुछ व्यक्तियों को भी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है।’
अब इन निष्कर्षों की समीक्षा CCI के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। इसके बाद कंपनियों और अधिकारियों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया जाएगा, जिसके बाद अंतिम आदेश जारी होगा।
जुर्माने का प्रावधान कितना सख्त है
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा स्टील उत्पादक देश है। CCI को अधिकार है कि वह नियमों के उल्लंघन पर कंपनियों पर मुनाफे का तीन गुना, या कुल टर्नओवर का 10 प्रतिशत (जो भी ज्यादा हो), प्रत्येक साल के लिए जुर्माने के तौर पर लगा सकती है। व्यक्तिगत अधिकारियों पर भी अलग से जुर्माना लगाया जा सकता है।
व्हाट्सऐप चैट से मिले संकेत
अक्टूबर के ऑर्डर में सबूतों का विस्तार से जिक्र नहीं किया गया। लेकिन, Reuters ने जुलाई 2025 के एक आंतरिक CCI दस्तावेज का हवाला देते हुए बताया कि अधिकारियों को रीजनल इंडस्ट्री ग्रुप्स के बीच हुई व्हाट्सऐप चैट्स मिली थीं। इन चैट्स से कीमतें तय करने और उत्पादन सीमित करने के संकेत मिले थे।
शेयर बाजार में दिखा असर
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद मंगलवार को JSW Steel, SAIL और Tata Steel के शेयरों में ऊपरी स्तर से तेज गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही निफ्टी मेटल इंडेक्स भी लाल निशान में आ गया।