
December Services PMI : दिसंबर में भारत के सर्विस सेक्टर के ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ गई। इस अवधि में सर्विस परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) पिछले महीने के 59.8 से गिरकर 11 महीने के निचले स्तर 58 पर आ गया। इस गिरावट के बावजूद, इंडेक्स अभी भी 50 के निशान से काफी ऊपर है। बता दें कि 50 का स्तर सर्विस सेक्टर की गतिविधि में विस्तार और संकुचन के विभाजक रेखा का काम करता है। यानी सर्विसेज PMI की 50 से ऊपर की रीडिंग सर्विस सेक्टर की गतिविधि में विस्तार का संकेत देती है। जबकि 50 से नीचे की रीडिंग सर्विस सेक्टर की गतिविधि में संकुचन का संकेत होती है। वहीं, कंपोजिट पीएमआई ( Composite PMI) किसी भी देश की आर्थिक स्थिति और बिज़नेस एक्टिविटी का अहम इंडिकेटर माना जाता है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर्स की स्थिति शामिल होते हैं।
दिसंबर की नरमी के बावजूद, पिछले सालों में सेक्टर का परफॉर्मेंस काफी मज़बूत रहा है। 2024 की शुरुआत मज़बूत तरीके से हुई थी। पहले आधे साल में PMI रीडिंग लगातार 60 से ऊपर रही। हालांकि सितंबर में सर्विस एक्टिविटी में थोड़ी गिरावट आई, लेकिन फिर से इसमें तेज़ी आई। 2025 के ज़्यादातर समय में भी इंडेक्स का औसत 60 के करीब रहा और अगस्त में तो यह 62.9 पर पहुंच गया। फिर साल के आखिर में इसमें थोड़ी नरमी आई। दिसंबर के आंकड़ों से पता चलता है कि लंबे समय तक तेज़ बढ़ोतरी के बाद अब रफ्तार सामान्य होने लगी है।
जब मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से तुलना की जाती है तो सर्विसेज़ सेक्टर की ताकत और भी ज़्यादा साफ़ दिखती है। ताजे आंकड़ों पर नजर डालें तो फ़ैक्ट्री एक्टिविटी में तेज़ी से गिरावट आई है। 2 दिसंबर को जारी मैन्युफैक्चरिंग PMI आंकड़ों से पता चलता है कि लगभग दो सालों में इसमें सबसे कम विस्तार देखने को मिला है। टैरिफ बढ़ने के दबाव और कम ग्लोबल डिमांड ने मर्चेंडाइज़ एक्सपोर्ट पर दबाव डाला है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेंटीमेंट और आउटपुट ग्रोथ कम हुई है।