
वेनेजुएला पर अमेरिका के कब्जे का असर सिर्फ क्रूड की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा। अमेरिका के इस दांव के पीछे उसकी सिर्फ उसकी ऑयल डिप्लोमैसी नहीं है। दरअसल, अमेरिका ऑयल की सप्लाई चेन को कंट्रोल में करना चाहता है। इससे उसे चीन के असर को कम करने में भी मदद मिलेगी। इस साल की शुरुआत में अमेरिका ने चीन के असर को कम करने के लिए पनामा को मनाने की कोशिश की थी। इस वजह से अमेरिका के इस कदम का असर पूरे फाइनेंशियल मार्केट्स पर पड़ेगा।
अमेरिकी प्रतिबंध और कोविड की महामारी ने वेनेजुएला की इकोनॉमी को ध्वस्त कर दिया है। वेनेजुअला की अर्थव्यवस्था तेल पर आधारित रही है। दुनिया में तेल का सबसे बड़ा भंडार वेनेजुएला में है। 2017 से पहले यह देश रोजाना 25 लाख बैरल से ज्यादा क्रूड ऑयल का उत्पादन करता था। पहली बार अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से ही डोनाल्ड ट्रंप की टेढ़ी नजर वेनेजुएला पर रही है। बतौर राष्ट्रपति अपने पहले कार्यकाल में ही ट्रंप ने वेनेजु्एला पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे।
अमेरिकी प्रतिबंध की वजह से 2015 से 2021 के बीच वेनेजुएला में तेल का उत्पादन 78 फीसदी तक घट गया। हाल में इसमें कुछ रिकवरी दिखी थी। यह रोजाना 10 लाख बैरल तक पहुंच गया था। अभी दुनिया में क्रूड के कुल उत्पादन में वेनेजुएला की हिस्सेदारी करीब एक फीसदी रह गई है, जो 2015 में 3.4 फीसदी थी। इससे पता चलता है कि पिछले करीब एक दशक से किस तरह साल दर साल वेनेजुएला की इकोनॉमी कमजोर होती गई।
अमेरिकी ऑयल कंपनियों ने वेनेजुएला के ऑयल एसेट्स को अपने कब्जे में लेने वाली हैं। इनमें Chevron, ExxonMobil, ConocoPhillips जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इससे आने वाले समय में वेनेजुएला में तेल का उत्पादन बढ़ना शुरू होगा। हालांकि, इसके लिए भारी निवेश करना होगा। रोजाना 20 लाख बैरल तक उत्पादन पहुंचाने के लिए टर्निनल्स, पावर ग्रिड, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन में काफी निवेश की जरूरत पड़ेगी।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि वेनेजु्एल में तेल उत्पादन क्षमता बढ़ने के बाद दुनिया में ऑयल के कुल उत्पादन में अमेरिका (वेनेजुएला) की हिस्सेदारी आसानी से 18 फीसदी के पार जा सकती है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि 1960 और 1970 के दशक में वेनेजुएला में ऑयल को रोजाना उत्पादन करीब 35 लाख बैरल था। इसका मतलब है कि वेनेजुएला के तेल की बदौलत दुनिया में ऑयल की सप्लाई में अमेरिका का दबदबा काफी बढ़ जाएगा। इसका सीधा असर कनाडा, रूस और मध्य पूर्व सहित पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
अमेरिका की नजरें वेनेजुएला के दूसरे प्राकृतिक संसाधनों पर भी है। इनमें नेचुरल गैस, कोयला और सोना शामिल हैं। हालांकि, अमेरिका ने कहा है कि चीन को वेनेजुएला से तेल की सप्लाई मिलती रहेगी। लेकिन, यह तय यह है कि अमेरिका इसके नियम और शर्तें अपने फायदे के हिसाब से तय करेगा। चीन की दिलचस्पी दक्षिण अमेरिकी देशों में रही है, जहां लिथियम, कॉपर, सिल्वर और निकेल का अच्छा रिजर्व है। चीन की कंपनियों ने 2023 में बोलिविया में दुनिया की सबसे बड़ी लिथियम माइंस का आधा हिस्सा खरीद लिया था।