
हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट की प्रतिद्वंद्वी फर्म ऑप्टिवर ने आईआईटी-हैदराबाद के स्टूडेंट एडवार्ड नाथन वर्गीज को 2.5 करोड़ रुपये सैलरी का जॉब ऑफर किया है। 21 साल के वर्गीज कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के फाइनल ईयर में हैं। उन्हें 2025 के प्लेसमेंट सीजन के दौरान यह ऑफर मिला है। यह 2008 में आईआईटी-हैदराबाद की शुरुआत के बाद से इंस्टीट्यूट के किसी स्टूडेंट को मिला सबसे ज्यादा सैलरी का ऑफर है।
जुलाई में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग काम शुरू करेंगे वर्गीज
वर्गीज जुलाई से Optiver में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर नौकरी शुरू करेंगे। प्री-प्लेसमेंट ऑफर (पीपीओ) के तहत दो महीने के समर इनटर्नशिप के बाद हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग फर्म ने उन्हें यह ऑफर दिया है। ऑप्टिवर के इनटर्नशिप प्रोग्राम के लिए दो स्टूडेंट्स का सेलेक्शन हुआ था। लेकिन, फुल-टाइम जॉब का ऑफर सिर्फ वर्गीज को मिला। इनटर्नशिप में दो हफ्ते की ट्रेनिंग के बाद छह हफ्ते का प्रोजेक्ट शामिल था।
ऑप्टिवर ने FY25 में भारत में 4.4 करोड़ डॉलर कमाए
वर्गीज ऑप्टिवर के नीदरलैंड स्थित ऑफिस में पोस्टेड होंगे। इस कंपनी ने इंडिया में FY25 में 4.4 करोड़ डॉलर का प्रॉफिट कमाया था। इससे पहले के छह महीनों में कंपनी को इंडिया में ट्रेडिंग से लॉस हुआ था। ऑप्टिवर की शुरुआत ट्रेडर जोहान केमिंग ने एम्सटर्डम में की थी। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग में अपनी क्षमता बढ़ा रही है। इसका मकसद ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी को और धारदार बनाना है।
दुनिया के 100 से ज्यादा एक्सचेंजों में करती है ट्रेडिंग
ऑप्टिवर लिस्टेड फ्यूचर्स, ऑप्शंस और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स पर फोकस करती है। यह दुनियाभर में 100 से ज्यादा एक्सचेंजों में ट्रेडिंग करती है। यह प्राइवेट कंपनी है, जिसका मालिकाना हक इसके मौजूदा और पूर्व एंप्लॉयीज के पास है। इसके लिए इंडिया और चीन सबसे तेजी से बढ़ने वाले बाजार है। ब्लूमबर्ग की जून 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके दुनियाभर में 2000 से ज्यादा एप्लॉयीज हैं।
2024 में इंडिया में ऑप्टटिवर ने शुरू की थी ट्रेडिंग
कंपनी ने 2024 में इंडियन मार्केट्स में ट्रेडिंग शुरू की थी। 2005 के अंत तक इसने इंडिया में अपने एंप्लॉयीज की संख्या बढ़ाकर 100 तक करने का प्लान बनाया था। कंपनी के प्रवक्ता ने जून 2025 में कहा था कि कंपनी इंडिया को लेकर बहुत उत्साहित है। ग्लोबल ट्रेडिंग फर्मों की इंडिया में दिलचस्पी से देश के दो बड़े स्टॉक एक्सचेंजों के लिए नए मौके खुले हैं। दोनों एक्सचेंज अपने टेक इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर फोकस कर रहे हैं।