
Nifty Outlook: शेयर बाजार में बुधवार को क्रिसमस की छुट्टी से पहले कोई खास हलचल नजर नहीं आई थी। भारतीय और वैश्विक बाजारों में छुट्टियों से पहले निवेशकों का रुख सतर्क रहा। इसी वजह से निफ्टी50 में एक और कंसोलिडेशन वाला सेशन देखने को मिला। दिनभर इंडेक्स 26,200 के ऊपर टिक नहीं पाया।
अब क्रिसमस की छुट्टी के बाद शुक्रवार, 26 दिसंबर को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, कौन से लेवल अहम रहेंगे, इसे एक्सपर्ट से समझेंगे। लेकिन, पहले जान लेते हैं कि बुधवार को बाजार में क्या खास हुआ था।
शुरुआत मजबूत, लेकिन फिर बिगड़ा मूड
बाजार की शुरुआत फ्लैट रही, लेकिन शुरुआती खरीदारी के दम पर निफ्टी पहले ही घंटे में 26,235 के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया। हालांकि सुबह करीब 10:30 बजे के बाद माहौल बदलने लगा। बिकवाली का दबाव बढ़ा और इंडेक्स अपने ऊपरी स्तर से 100 अंकों से ज्यादा फिसल गया।
सेशन के दौरान कोई तेज गिरावट नहीं दिखी। छुट्टियों की वजह से वॉल्यूम हल्के रहे और बाजार ज्यादातर दायरे में ही घूमता रहा। इसके बावजूद निफ्टी अपनी शुरुआती बढ़त को संभाल नहीं सका और धीरे धीरे फिसलता चला गया। अंत में इंडेक्स दिन के निचले स्तर के आसपास 35 अंक गिरकर 26,142 पर बंद हुआ।
आईटी शेयरों पर लगातार दबाव
अमेरिका ने H-1B वीजा चयन प्रक्रिया में बदलाव किया है। इसके बाद आईटी सेक्टर में कमजोरी लगातार दूसरे दिन भी बनी रही। बुधवार के कारोबार में Wipro, Infosys और HCL Technologies के शेयर दबाव में नजर आए और इंडेक्स की गिरावट की बड़ी वजह बने।
निफ्टी में Trent, Shriram Finance और Apollo Hospital सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले शेयरों में रहे। वहीं दूसरी ओर Indigo, Adani Enterprise और Dr Reddy’s के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला और ये दिन के बड़े गिरावट वाले शेयर रहे।
सेक्टोरल फ्रंट पर ज्यादातर लाल निशान
Nifty Media, Realty और Metal को छोड़कर बाकी सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। इनमें OIL/GAS, Pharma और IT सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।
ब्रॉडर मार्केट में मिला जुला रुख रहा। Nifty Midcap 100 में 0.60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि Nifty Smallcap इंडेक्स ने बाजार के ट्रेंड के उलट 0.3 प्रतिशत की बढ़त दिखाई।
रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर
दो दिन के कंसोलिडेशन के बाद बुधवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 13 पैसे टूट गया और अपने एशियाई समकक्षों से पिछड़ गया। इसकी वजह छुट्टियों से पहले विदेशी निवेशकों की लगातार कैपिटल निकासी, रिस्क से बचने का माहौल और बुलियन आयातकों की ओर से डॉलर की बढ़ी मांग रही।
अमेरिका के जॉबलेस क्लेम्स पर भी नजर
मैक्रो फ्रंट पर निवेशकों की नजर अमेरिका के जॉबलेस क्लेम्स डेटा पर रही, जो क्रिसमस की छुट्टी की वजह से एक दिन पहले जारी किया गया। अमेरिकी श्रम विभाग के मुताबिक, 20 दिसंबर को खत्म हुए हफ्ते में बेरोजगारी भत्ते के नए आवेदन 10,000 घटकर 2,14,000 रह गए। इससे पहले यह आंकड़ा 224,000 था। यह FactSet के सर्वे में अनुमानित 232,000 से भी कम रहा।
Motilal Oswal के सिद्धार्थ खेमका का मानना है कि बड़े ट्रिगर्स की कमी और दुनियाभर के बाजारों में छुट्टियों के चलते कम भागीदारी की वजह से इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में ही बना रह सकता है।
निफ्टी पर एक्सपर्ट की राय
HDFC Securities के नागराज शेट्टी का कहना है कि बाजार में फिलहाल जो सुस्त चाल देखने को मिल रही है, वह अस्थायी हो सकती है। उनके मुताबिक, निफ्टी निचले स्तरों से जल्द ही तेज रिकवरी दिखा सकता है। उन्होंने निफ्टी के लिए 26,000 के स्तर को तुरंत सपोर्ट बताया है, जबकि 26,300 के आसपास रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है।
HDFC Securities के ही नंदीश शाह का मानना है कि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली के बावजूद निफ्टी का शॉर्ट टर्म ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव बना हुआ है। उनके अनुसार, 26,000 का स्तर नजदीकी सपोर्ट के तौर पर काम करेगा। ऊपर की ओर 26,240 को तत्काल रेजिस्टेंस माना जा रहा है और इसके बाद 26,330 का स्तर अहम रहेगा।
SBI Securities के सुदीप शाह का कहना है कि जब तक बैंक निफ्टी ट्रेंडलाइन के ऊपर मजबूती के साथ और निर्णायक क्लोजिंग दर्ज नहीं करता, तब तक किसी बड़े और साफ दिशात्मक मूव की उम्मीद नहीं की जा सकती।
बैंक निफ्टी का हाल
बैंक निफ्टी 17 दिसंबर को ब्रेकडाउन के बाद से अपनी ऊपर की ओर झुकी ट्रेंडलाइन के नीचे ही कारोबार कर रहा है। दिन के दौरान कई बार इंडेक्स ने इस अहम स्तर को दोबारा हासिल करने की कोशिश की, लेकिन हर बार क्लोजिंग इसके ऊपर देने में नाकाम रहा।
सुदीप शाह के मुताबिक, 59,000 से 58,900 का जोन बैंक निफ्टी के लिए तुरंत सपोर्ट का काम करेगा। अगर इंडेक्स 58,900 के नीचे टिकता है, तो शॉर्ट टर्म में इसमें 58,600 और उसके बाद 58,300 तक गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं ऊपर की ओर 59,500 से 59,600 का जोन मजबूत रेजिस्टेंस के तौर पर देखा जा रहा है।
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