RBI ने रुपये को गिरने से बचाने के लिए अक्तूबर में बेचे थे 11.88 अरब डॉलर – rbi had sold 11 88 billion dollar to prevent rupee from falling against dollar in october



आरबीआई ने रुपये में भारी उतार-चढ़ाव के बीच अक्तूबर में शुद्ध रूप से 11.88 अरब डॉलर की बिकवाली की। यह दिसंबर 2024 के बाद किसी एक महीने में डॉलर की सबसे ज्यादा बिकवाली है। सितंबर में केंद्रीय बैंक ने शुद्ध रूप से 7.9 अरब के डॉलर बेचे थे।

अक्टूबर में खरीदारी से ज्यादा डॉलर की बिकवाली 

अक्तूबर में फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में आरबीआई की डॉलर की बिकवाली से रुपये को सहारा देने की केंद्रीय बैंक की कोशिशों का पता चलता है। आरबीआई ने अपने मंथली बुलेटिन में कहा है कि उसने अक्तूबर में 17.69 अरब डॉलर खरीदे, जबकि 29.56 अरब डॉलर की बिकवाली की।

अक्टूबर में रुपया डॉलर के मुकाबले 87-88 की रेंज में

अक्तूबर में डॉलर के मुकाबले रुपया 87-88 की रेंज में था। इसके बाद रुपये में गिरावट शुरू हो गई। इसमें फॉरेन इनवेस्टर्स की इंडियन मार्केट्स में बिकवाली का हाथ है। पिछले हफ्ते डॉलर के मुकाबले गिरकर 91 के पार चला गया था। उसके बाद आरबीआई को इसे और गिरने से बचाने के लिए हस्तक्षेप करने को मजबूर होना पड़ा।

रुपये में बड़ी गिरावट का असर मार्केट के सेंटीमेटं पर भी

हाल में रुपये में आई तेज गिरावट का असर स्टॉक मार्केट्स पर भी पड़ा। लगातार कमजोर होते रुपये की वजह से महंगाई को भी बढ़ावा मिलने की आशंका है। खासकर आयातित चीजों की कीमतें बढ़ने का असर ओवरऑल इनफ्लेशन पर पड़ेगा। इस वजह से आरबीआई ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर की बिकवाली की।

फिलहाल रुपये पर जारी रह सकता है दबाव

एक्सपर्ट्स का कहना है कि रुपये पर फिलहाल जारी रह सकता है। इसकी बड़ी वजह भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील में हो रही देरी है। इस साल अब तक डॉलर के मुकाबले रुपये में 4.7 फीसदी गिरावट आई है। इसका असर सेंटिमेंट पर पड़ा है। काफी समय तक रुपये की छवि एशिया में सबसे स्टैबल करेंसी के रूप में रही थी। लेकिन, यह इस साल एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन वाली करेंसी बन गया है। इसके बाद दूसरे नबंर पर इंडोनेशिया का रुपिया है।

2017 से सालाना 4 फीसदी गिरा है रुपया

आरबीआई को कोशिशों के बावजूद रुपये में बीते 13 सालों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 2012 के मुकाबले इसकी वैल्यू करीब 90 फीसदी गिर चुकी है। तब डॉलर के मुकाबले रुपया 48 के लेवल पर था। रुपये में डॉलर के साथ ही दूसरी एशियाई करेंसी के मुकाबले कमजोरी देखने को मिली है। 2017 से रुपये में सालाना औसत गिरावट 4 फीसदी रही है।



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