भारतीय शेयर बाजार में 2025 के दौरान भले ही तेज उतार-चढ़ाव बना रहा, लेकिन इसके बावजूद 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की मार्केट कैप वाली कंपनियों की संख्या में इजाफा हुआ है। यह लार्जकैप शेयरों में निवेशकों की बढ़ती हिस्सेदारी को दिखाता है। साल 2025 में अब तक करीब 110 कंपनियां ऐसी हो चुकी हैं, जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। ये कंपनियां मिलकर BSE में लिस्टेड सभी कंपनियों के कुल मार्केट कैप का लगभग 62% हिस्सा रखती हैं।
इसके मुकाबले 2024 के अंत में यह संख्या 97 कंपनियों की थी, जो कुल मार्केट कैप का करीब 60% हिस्सा थीं। यानी एक साल में इस क्लब में कंपनियों की संख्या में लगभग 12.4% की बढ़ोतरी हुई है।
रिलायंस सबसे आगे, बैंकिंग और टेलीकॉम का दबदबा
मार्केट कैप के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने 2025 में भी देश की सबसे अधिक मार्केट वैल्यू वाली कंपनी का ताज बरकरार रखा है। रिलायंस का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹20.89 लाख करोड़ रहा। इसके बाद दूसरे स्थान पर HDFC Bank है, जिसका मार्केट कैप ₹15.07 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है। वहीं टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी Bharti Airtel करीब ₹12.75 लाख करोड़ के मार्केट कैप के साथ तीसरे स्थान पर बनी हुई है।
मिडकैप और स्मॉलकैप की तुलना में लार्जकैप का बेहतर प्रदर्शन
इंडिपेंडेंट एनालिस्ट अजय बग्गा का कहना है कि 2025 में लार्जकैप और मेगाकैप स्टॉक्स के मुकाबले मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक्स का परफॉर्मेंस खराब रहा है। उनके मुताबिक, इस अंतर के चलते कई निवेशकों के पोर्टफोलियो पर दबाव देखने को मिला, जबकि बेंचमार्क इंडेक्स अपने पुराने रिकॉर्ड हाई के आसपास बने रहे। अजय बग्गा का मानना है कि 2024 से अब तक बाजार की कहानी मुख्य रूप से लार्जकैप शेयरों के प्रदर्शन के इर्द-गिर्द घूमती रही है।
2025 में पहली बार ₹1 लाख करोड़ क्लब में शामिल हुईं 20 कंपनियां
₹1 लाख करोड़ के मार्केट कैप वाले क्लब में अब कुल 110 कंपनियां शामिल हो चुकी हैं। इनमें से 20 कंपनियां ऐसी हैं, जिन्होंने 2025 में पहली बार यह मुकाम हासिल किया। इसके अलावा, चार नई लिस्टेड कंपनियां भी सीधे इस क्लब में पहुंची हैं। इनमें LG इलेक्ट्रॉनिक्स, टाटा कैपिटल, ग्रो (Groww) और मीशो (Meesho) शामिल हैं।
पहले से लिस्टेड कई कंपनियों ने भी बड़ी छलांग लगाई
2025 में कई ऐसी कंपनियां भी ₹1 लाख करोड़ क्लब में शामिल हुईं, जो पहले से शेयर बाजार में लिस्टेड थीं। इनमें मुथूट फाइनेंस, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस, केनरा बैंक, वोडाफोन आइडिया, कमिंस इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी एएमसी, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, बीएसई, जीएमआर एयरपोर्ट्स, आईडीबीआई बैंक और इंडियन बैंक जैसे नाम शामिल हैं।
कई कंपनियां क्लब के बेहद करीब
इसके साथ ही कई कंपनियां ऐसी भी हैं, जो ₹1 लाख करोड़ मार्केट कैप के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं। इनमें HPCL, ICICI लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस, मैरिको, PB फिनटेक, BHEL, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, श्री सीमेंट, जायडस लाइफसाइंसेज और SRF शामिल हैं।
2024 की तुलना में 12 कंपनियां क्लब से बाहर
जहां एक ओर कई कंपनियां इस खास क्लब में शामिल हुईं, वहीं 12 कंपनियां ऐसी भी रहीं, जो 2024 में ₹1 लाख करोड़ के ऊपर थीं लेकिन 2025 में इनके शेयरों में आई गिरावट के चलते ये इस स्तर से नीचे फिसल गईं।
इनमें मैनकाइंड फार्मा, इन्फो एज, JSW एनर्जी, ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज सॉफ्टवेयर, डिक्सन टेक्नोलॉजीज, ल्यूपिन, NTPC ग्रीन एनर्जी, बजाज हाउसिंग फाइनेंस, हैवेल्स इंडिया, अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइजेज और परसिस्टेंट सिस्टम्स शामिल हैं।
लगातार बढ़ रहा ₹1 लाख करोड़ क्लब
पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस क्लब का विस्तार लगातार हुआ है। 2023 में जहां ऐसी कंपनियों की संख्या करीब 75 थी, वहीं 2022 में यह 54 और 2021 में 49 थी। इससे पहले 2019 और 2020 में यह आंकड़ा काफी कम रहा था, जब क्रमशः करीब 29 और 31 कंपनियां ही ₹1 लाख करोड़ के मार्केट कैप के पार थीं।

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