2026 में आईटी और केमिकल्स स्टॉक्स में होगी जोरदार कमाई, पीएल एसेट के सिद्धार्थ वोरा ने बताई वजह – siddharth vora of pl asset management sees contrarian opportunities in it and chemical sectors



नया साल शुरू हो गया है। 2026 के दूसरे दिन ही निफ्टी ने ऊंचाई का नया रिकॉर्ड बना दिया। इससे नए साल को लेकर निवेशकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। सवाल है कि रिटर्न के लिहाज से 2026 कैसा रहेगा, किन सेक्टर्स में ज्यादा कमाई के मौके दिख रहे हैं? इन सवालों का जवाब जानने के लिए मनीकंट्रोल ने पीएल एसेट मैनेजमेंट के हेड (क्वांट इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजीज) और फंड मैनेजर सिद्धार्थ वोरा से बातचीत की।

2026 में मार्केट के लिए स्थितियां अनुकूल

वोरा ने कहा कि 2026 में मार्केट में 10 फीसदी या इससे ज्यादा तेजी दिख सकती है। इसमें अर्गिंग्स ग्रोथ में इम्प्रूवमेंट, अच्छी डोमेस्टिक लिक्विडिटी, न्यूट्रल वैल्यूएशंस और नई डिमांड का हाथ होगा। अगले हफ्ते से दिसंबर तिमाही के नतीजे आने शुरू हो जाएंगे। इससे अर्निंग्स अपग्रेड की नई साइकिल शुरू होने की उम्मीद है। नए साल में कई पॉजिटिव चीजें दिख रही हैं। सरकार का पूंजीगत खर्च पर फोकस बना हुआ है। कंपनियों की बैलेंसशीट स्ट्रॉन्ग हैं। क्रेडिट ग्रोथ स्टेबल है।

इंडिया अट्रैक्टिव मार्केट हो सकता है

उन्होंने कहा कि मॉनेटरी और फिस्कल पॉलिसी अनुकूल है। ट्रेड एग्रीमेंट्स होने की उम्मीद है। बीते साल उभरते और विकसित बाजारों के मुकाबले इंडियन मार्केटस् का प्रदर्शन कमजोर रहा है। सोने में भी निवेश जारी रह सकता है। इसके अलावा ग्लोबल एआई ट्रेड को लेकर घटते भरोसा के बीच इंडिया एक न्यूट्रल और अट्रैक्टिव मार्केट हो सकता है।

कुछ खास सेक्टर्स में ज्यादा अर्निंग्स ग्रोथ

अर्निंग्स ग्रोथ के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि एक समान अर्निंग्स ग्रोथ की जगह कुछ खास सेक्टर में ज्यादा अर्निंग्स ग्रोथ दिखेगी। वैश्विक चुनौतियां बनी हुई हैं। लेकिन घरेलू डिमांड से जुड़े सेक्टर की अर्निंग्स ग्रोथ आपको चौंका सकती हैं। ऐसे में रिटर्न में शेयरों के सेलेक्शन का बड़ा हाथ होगा। दिसंबर साइकिल की अर्निंग्स साइकिल में फाइनेंशियल्स, मेटल्स और इंडस्ट्रियल्स में अपग्रेड देखने को मिल सकता है।

आईटी और केमिकल सेक्टर में कमाई के मौके

वोरा ने 2026 के लिए आईटी और केमिकल्स को कंट्रेरियन अपॉर्चुनिटीज बताया। उन्होंने कहा कि इन दोनों सेक्टर्स का प्रदर्शन 2025 में कमजोर रहा। इसकी वजह ग्लोबल स्लोडाउन और प्राइसिंग प्रेशर था। कुछ कंपनियों का प्रदर्शन दमदार रह सकता है, क्योंकि लॉन्ग टर्म फंडामेंटल्स के लिहाज से वैल्यूएशन अट्रैक्टिव दिख रही है और डिमांड में स्टैबिलिटी है।



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