
अहमदाबाद में हुए मनीकंट्रोल म्यूचुअल फंड समिट के दौरान फंड मैनेजरों ने कहा कि हाल के सालों में आई तेजी और हाल की भारी गिरावट,दोनों देखने के बाद ऐसा लगता है कि स्मॉल-कैप स्टॉक अब एक ऐसे दौर में आ रहे हैं,जहां सोच-समझकर स्टॉक चुनना और सब्र रखना ही नतीजे तय करेंगे। वैल्यूएशन के ऊंचे लेवल से करेक्ट होने और अर्निंग की रफ़्तार धीमी होने के साथ, अब पहले की तरह एक तरफा तेज़ी की उम्मीद नहीं है। ऐसे में हमें बाजार में समझदारी भरे फैसले लेने की जरूरत है।
टाटा AMC के सीनियर फंड मैनेजर चंद्रप्रकाश पडियार, ICICI प्रूडेंशियल AMC के सीनियर फंड मैनेजर इहाब दलवई, और HSBC म्यूचुअल फंड में फंड मैनेजमेंट इक्विटीज की SVP चीनू गुप्ता ने इस समिट में कहा कि 2020 और 2024 के बीच आए तेज उछाल कम बेस इफेक्ट और लिक्विडिटी की वजह से स्मॉल कैप ने काफी अच्छा रिटर्न दिया। लेकिन अब अगले कुछ सालों तक हमें इस स्पेस में अच्छे भाव पर मिल रहे चुनिंदा क्वालिटी शेयरों पर ही फोकस करने की रणनीति पर काम करना होगा।
पडियार ने कहा कि 2021 से 2024 का समय असामान्य था क्योंकि इस दौरान स्मॉल-कैप यूनिवर्स में अर्निंग में छोटे बेस से तेज बढ़त देखने को मिली, जिससे बड़े पैमाने पर तेजी देखने को मिली। 2024 में वैल्यूएशन बहुत ज़्यादा हो गए। इसको देखते हुए टाटा स्मॉल कैप फंड ने जून 2023 से एकमुश्त निवेश लेना बंद कर दिया और पिछले दो सालों से कंज़र्वेटिव नजरिया बनाए रखा है।
स्मॉलकैप स्पेस में एकतरफा रैली की उम्मीद नहीं
उन्होंने कहा कि स्मॉलकैप स्पेस में हाल के करेक्शन के बाद ऐसी कई कंपनियां मौजूद हैं जिनकी अर्निंग में अच्छी बढ़त हो सकती और अब इनके वैल्यूएशन भी ज़्यादा सही लेवल पर हैं,हालांकि अभी भी ये शेयर सस्ते नहीं हैं। ऐसे में अब इस स्पेस में पहले की तरह एक तरफा रैली की उम्मीद नहीं है। ऐसे में हमें अगले तीन से चार सालों तक इस स्पेस में बॉटम-अप स्टॉक सेलेक्शन रणनीति अपनाने की जरूरत होगी।
ऑटो, रियल एस्टेट और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े शेयर लग रहे अच्छे
इहाब दलवई ने कहा कि हालांकि वैल्यूएशन में सुधार हुआ है और 2024 में जो अंधाधुंध जोश दिख रहा था वह कम हो गया है, फिर भी स्मॉल कैप्स, लार्ज कैप्स के मुकाबले प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। पहले,एक ऐसा समय थे जब स्मॉल कैप्स डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहे थे। ऐसे में हमें अच्छे भाव पर मिल रहे क्विलिटी शेयरों पर ही फोकस करना चाहिए। इस सेगमेंट में अभी कई अच्छे शेयर है। खास कर उन सेक्टर्स में अच्छे मौके हैं जहां खुद स्मॉल कैप्स ही सेक्टर लीडर हैं। ऐसे सेक्टर्स में ऑटो, रियल एस्टेट और मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस समय स्मॉल कैप्स को पोर्टफोलियो का हिस्सा होना चाहिए लेकिन पोर्टफोलियो का मुख्य हिस्सा नहीं होना चाहिए।
अच्छे फंडामेंटल्स वाली कंपनियों पर ही रहे फोकस
चीनू गुप्ता ने कहा कि स्मॉल कैप में स्टॉक्स का सही चुनाव बहुत ज़रूरी है । उन्होंने कहा इनको चुनते समय सिर्फ़ शॉर्ट-टर्म अर्निंग्स ग्रोथ की ही ध्यान न रखें। ज़रूरी बात यह देखना है कि क्या कोई कंपनी तीन से पांच साल के समय में लगातार ग्रोथ कर सकती है। एक साल की अर्निंग्स ग्रोथ से ज़्यादा ज़रूरी है स्केलेबिलिटी। इन्वेस्टर्स को इन शेयरों को चुनते समय कंपनियों की अर्निंग्स क्वालिटी,कैपिटल एलोकेशन में मैनेजमेंट डिसिप्लिन और प्रमोटर्स से आगे मैनेजमेंट बैंडविड्थ बनाने की क्षमता का मूल्यांकन करना चाहिए। इसका मकसद उन स्मॉल-कैप कंपनियों की पहचान करना है जो समय के साथ मिड-कैप बिज़नेस में बदल सकती हैं।
इहाब दलवई ने कहा कि इंडेक्स लेवल पर,स्मॉल-कैप परफॉर्मेंस शायद अलग-अलग कंपनियों की सफलता को पूरी तरह से नहीं दिखा पाएंगी क्योंकि जो कंपनियां अच्छा परफॉर्म करती हैं,वे अक्सर मिड-कैप इंडेक्स में आ जाती हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि स्मॉल कैप में सफलता का रेश्यो लार्ज और मिड कैप की तुलना में कम है। इनके वैल्यूएशन प्रीमियम पर बने हुए हैं और अर्निंग की रफ़्तार धीमी हो रही है। पिछले दो सालों में स्मॉल-कैप कैटेगरी में म्यूचुअल फंड का निवेश सालाना 40,000 करोड़ रुपये से 50,000 करोड़ रुपये के बीच रहा है,जो इनमें निवेशकों की लगातार बनी दिलचस्पी का संकेत है।
प्रिसिजन इंजीनियरिंग, ऑटो इंजीनियरिंग, कैपिटल गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग में निवेश के मौके
चंद्रप्रकाश पडियार ने कहा कि 5,000 करोड़ रुपये से 15,000 करोड़ रुपये के मार्केट कैपिटलाइज़ेशन बैंड में,चुनने के लिए 400 से ज़्यादा कंपनियां हैं। इस सेगमेंट में कंपनियां 10 से 15 गुना प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल पर उपलब्ध हैं। इनमें अच्छा कैश फ्लो जेनरेशन,20 फीसदी से ज़्यादा की अनुमानित अर्निंग्स ग्रोथ और लगाए गए कैपिटल पर रिटर्न 20 फीसदी के करीब है। पडियार को प्रिसिजन इंजीनियरिंग, ऑटो इंजीनियरिंग, कैपिटल गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग बिज़नेस से जुड़ी कंपनियां पसंद हैं। मैन्युफैक्चरिंग में उनको खासकर वे कंपनियां पसंद हैं जो रिसर्च और डेवलपमेंट में इन्वेस्ट करती हैं और पेटेंट हासिल करती हैं।
स्मॉल-कैप इन्वेस्टिंग के लिए दो से तीन साल के सब्र की जरुरत
चीनू गुप्ता ने कहा कि सितंबर 2024 के पीक के बाद, मार्केट में प्राइस करेक्शन और टाइम करेक्शन दोनों ही देखने को मिले हैं,जिससे बाजार में सावधानी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि स्मॉल-कैप इन्वेस्टिंग के लिए दो से तीन साल का सब्र चाहिए। उनका मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड कंपनियों और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके बड़े लेवल पर काम करने वाली कंपनियों में निवेश के मौके हैं। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी ने बड़ी और छोटी कंपनियों के बीच पारंपरिक बाधाओं को कम किया है। टेक्नोलॉजी के चलते छोटी कंपनियां अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और कामकाज को ज़्यादा असरदार तरीके से बढ़ा पाई हैं।
फंड मैनेजरों ने कहा कि स्मॉल कैप के लिए अगले फेज़ में लिक्विडिटी से ज्यादा अहम कंपनी-स्पेसिफिक फंडामेंटल्स होंगे। ऐसे में इस स्पेस में कमाई के लिए निवेशकों को सब्र के साथ अनुशासित तरीके से चुनिंदा क्वालिटी शेयरों पर फोकस करना होगा।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।