शेयर मार्केट की सुस्ती रियल एस्टेट पर भारी, क्या अब सस्ते होंगे घर? जल्दबाजी में खरीदारी से पहले समझें गणित – real estate connection with stock market weighs on housing sales will home prices fall



Real Estate connection with Stock Market: घरेलू स्टॉक मार्केट की सुस्ती और निवेशकों के सेंटिमेंट में उठा-पटक अब देश के रियल एस्टेट सेक्टर पर असर डालने लगी है। इसका असर मिड-इनकम और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट में अधिक दिख रहा है। डेवलपर्स के मुताबिक घरों की बिक्री सुस्त हुई है और खरीदार सतर्कता बरत रहे हैं। कोरोना महामारी के बाद घरों की बिक्री में तेज रिकवरी हुई लेकिन हाल-फिलहाल की तिमाहियों में सेल्स की रफ्तार सुस्त पड़ी है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि शेयर मार्केट में लंबे समय से जारी उतार-चढ़ाव, सीमित वेल्थ क्रिएशन और निवेशकों का ‘रुककर देखने’ का रुख; प्रॉपर्टी की खरीदारी पर असर डाल रहा है।

कैसे मिले संकेत?

रियल एस्टेट मार्केट में सुस्ती का संकेत डेवलपर्स के गाइडेंस में दिखने लगा है। मिड-इनकम और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट की दिग्गज कंपनी सिग्नेचल ग्लोबल (इंडिया) ने इस महीने की शुरुआत में संकेत दिया कि सुस्त मांग के चलते वह चालू वित्त वर्ष के लिए अपने सेल्स टारगेट को पूरा नहीं कर पाएगी। एनालिस्ट्स का मानना है कि यह रेजिडेंशियल मार्केट में व्यापक दबाव का शुरुआती संकेत है। उनका मानना है कि ऊंची कीमतों और नए प्रोजेक्ट लॉन्च में सुस्ती के बीच गुरुग्राम में हाउसिंग डिमांड कमजोर पड़ सकती है।

सिर्फ सिग्नेचर ग्लोबल ही नहीं, डीएलएफ और ओबेराय रियल्टी जैसे दूसरे अहम लिस्टेड डेवलपर्स को भी झटका लगने की आशंका है। ब्रोकरेज फर्म नोमुरा सिक्योरिटीज ने अपने हालिया नोट में जिक्र किया कि डीएलएफ की प्री-सेल्स 92% और ओबेरॉय रियल्टी की प्री-सेल्स में 43% की गिरावट आ सकती है। दिल्ली-एनसीआर के एक रियल एस्टेट कंसल्टेंट का कहना है कि शहरों में रियल एस्टेट की मांग का शेयर मार्केट से सीधा संबंध है और जब यह कमजोर होता है तो या लिमिटेड रेंज में रहता है तो खरीदार घर जैसी बड़ी खरीद को टाल देते हैं।

हालांकि यह सुस्ती गुरुग्राम जैसे रियल एस्टेट मार्केट में अधिक है, जहां पिछले दो-तीन वर्षों में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं जिससे अफोर्डिबिलिटी की चिंता भी बढ़ी है। हालांकि पूरे सेक्टर में ऐसा नहीं है और कुछ माइक्रो-मार्केट्स और अच्छी लोकेशन के अफोर्डेबेल प्रोजेक्ट्स में जेनुइन एंड-यूजर्स के चलते मांग स्थिर बनी हुई है। कमर्शियल रियल एस्टेट, खासतौर से ऑफिस लीजिंग, भी मजबूत बना हुआ है, जिससे डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो वाले डेवलपर्स को कुछ सहारा मिला है।

तो क्या गिरने वाली हैं प्रॉपर्टी की कीमतें?

मांग में सुस्ती के चलते एक सवाल उठ रहा है कि क्या अब प्रॉपर्टी की कीमतें गिरेगी? इसे लेकर बाजार के जानकारों का कहना है कि फिलहाल कीमतों में कटौती की संभावना कम है, लेकिन मांग के हिसाब से डेवलपर्स अपनी रणनीतियों में बदलाव कर सकते हैं। मुंबई की रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म प्रॉपर्टीपिस्टल (PropertyPistol) के फाउंडर और एमडी आशीष नारायण अग्रवाल का कहना है कि कंस्ट्रक्शन और जमीन की खरीदारी में खर्च अधिक होने के चलते सीधे कीमतों में कटौती की गुंजाइश काफी कम है लेकिन डेवलपर्स पेमेंट को लेकर फ्लेक्सिबिलिटी, एक सीमित समय के इंसेंटिव और स्टॉम्प ड्यूटी के सपोर्ट के जरिये खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं। उनका कहना है कि कई डेवलपर्स वॉल्यूम की बजाय चरणबद्ध तरीके से लॉन्चिंग और सेल-थ्रू एफिसिएंसी पर ध्यान दे रहे हैं।

इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स का मानना है कि ब्याज दरों में नरमी और नीतिगत सपोर्ट के साथ मिलकर शेयर मार्केट में रिकवरी के चलते घर खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा। तब तक डेवलपर्स को आक्रामक तरीके से सेल्स टारगेट का पीछा करने की बजाय ग्रोथ की उम्मीदों को फिर से तय करने के साथ-साथ एग्जीक्यूशन और बैलेंस शीट की मजबूती पर फोकस करना चाहिए।



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