
कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI ने शेयर बाजारों में ट्रेडिंग से संबंधित फ्रेमवर्क में बड़े बदलाव का प्रपोजल रखा है। इसका मकसद नियमों को सरल बनाना, डुप्लीकेशन को हटाना और मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए कंप्लायंस के बोझ को कम करना है। ये प्रस्ताव शेयर बाजारों और कमोडिटी डेरिवेटिव्स एक्सचेंजेस में कारोबारी सुगमता बढ़ाने की सेबी की व्यापक पहल का हिस्सा हैं।
सेबी ने अपने कंसल्टेशन पेपर में ट्रेडिंग, प्राइस बैंड, सर्किट ब्रेकर, थोक सौदों के खुलासे, कॉल ऑक्शन मैकेनिज्म, लिक्विडिटी बेहतर बनाने की स्कीम, मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी, यूनीक क्लाइंट कोड (UCC), PAN रिक्वायरमेंट्स, कारोबारी घंटे और डेली प्राइस लिमिट से संबंधित कई प्रावधानों को आपस में मिलाने का सुझाव दिया है। इन्हें इक्विटी और कमोडिटी दोनों सेगमेंट्स के लिए लागू करने का प्रस्ताव है।
सेबी ने सुझाव दिया कि विशेष रूप से सेटलमेंट पर लागू होने वाले प्रावधानों को अलग करके एक अलग ‘मास्टर सर्कुलर’ में शिफ्ट करना चाहिए, ताकि रेगुलेटरी डुप्लीकेशन से बचा जा सके। पारदर्शिता में सुधार लाने के लिए सेबी ने बल्क और ब्लॉक डील के खुलासों को मिलाने और जानकारी के प्रसार को UCC स्तर के बजाय क्लाइंट PAN स्तर पर शिफ्ट करने का प्रस्ताव दिया है।
ये सुझाव भी दिए
रेगुलेटर ने सुझाव दिया है कि मार्केट-वाइड सर्किट ब्रेकर नियम, डायनैमिक प्राइस बैंड फ्लेक्सिंग, IPO प्राइस बैंड और कॉल ऑक्शन प्रक्रियाओं को टेबुलर फॉर्म में पेश किया जाना चाहिए। साथ ही कई डुप्लीकेट या पुराने ऑपरेशनल उदाहरणों को हटा दिया जाना चाहिए। रेगुलेटर ने मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी नियमों को आसान बनाने का भी प्रस्ताव दिया है। इसमें ब्रोकर्स के लिए न्यूनतम नेट वर्थ की जरूरत को 3 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा करना शामिल है। नेट-वर्थ और ऑडिटर सर्टिफिकेट जमा करने की टाइमलाइन फाइनेंशियल रिपोर्टिंग साइकिल के हिसाब से होनी चाहिए, और बेकार ड्यू डिलिजेंस क्लॉज को हटा दिया जाना चाहिए।
कैश सेगमेंट के लिए पुराने मार्केट-मेकिंग प्रावधानों को हटा दिया जाना चाहिए और उन्हें एक सिद्धांत-बेस्ड लिक्विडिटी एन्हैंसमेंट स्कीम (LES) फ्रेमवर्क में मिला दिया जाना चाहिए। एक्सचेंजों और क्लियरिंग कॉर्पोरेशंस के बीच पेनल्टी को भी एक जैसा किया जाएगा। सेबी ने सेकेंडरी मार्केट में ब्लॉक्ड अमाउंट के साथ UPI बेस्ड ट्रेडिंग से संबंधित प्रावधानों को अपडेट करने का भी प्रस्ताव रखा है। सेबी ने इन प्रस्तावों पर 30 जनवरी 2026 तक पब्लिक कमेंट्स मांगे हैं।