
Rising Bharat Summit 2026: टेलीकॉम मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 27 फरवरी को साफ किया कि सरकार की वोडाफोन आइडिया में अपनी हिस्सेदारी को 49% से अधिक बढ़ाने की कोई इच्छा नहीं है। News18 राइजिंग भारत समिट में बोलते हुए सिंधिया ने कहा कि AGR बकाया को इक्विटी में बदलने के बाद सरकार की हिस्सेदारी कंपनी में 49% हो गई है और यह कदम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप उठाया गया है।
सिंधिया ने कहा कि वोडाफोन के मामले में हम इक्विटी होल्डर हैं, लेकिन मैनेजमेंट में हमारी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा, “वोडाफोन के मैनेजमेंट को अपनी ग्रोथ की रणनीति खुद तय करनी है।”
AGR मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब भारती एयरटेल ने टेलीकॉम डिपार्टमेंट (DoT) को लेटर लिखकर अपने बकाया के संबंध में स्पष्टता और समान व्यवहार की मांग की है। सिंधिया ने कहा, ““हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत काम कर रहे हैं। जहां तक AGR का सवाल है, हमने जो भी कदम उठाया है, वह उसी फैसले के आधार पर उठाया है।”
कुछ सप्ताह पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वोडाफोन आइडिया के AGR बकाये को 31 दिसंबर 2025 तक ₹87,695 करोड़ पर फ्रीज करने और FY32 से FY41 के बीच चरणबद्ध तरीके से भुगतान करने की योजना को मंजूरी दी थी। साथ ही, टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने FY17 से FY19 के बीच की अवधि के लिए वोडाफोन आइडिया की AGR देनदारियों की रीकैलकुलेशन भी शुरू की है, जो सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर और नवंबर के आदेशों के मुताबिक है।
टेलीकॉम मिनिस्टर के इस बयान से यह साफ हो गया है कि सरकार वोडाफोन आइडिया में निवेशक की भूमिका में रहेगी, लेकिन मैनेजेटमेंट और संचालन की जिम्मेदारी कंपनी के हाथ में ही रहेगी।
सैटेलाइट कनेक्टिविटी पर भी जोर
सिंधिया ने सैटेलाइट कनेक्टिविटी को भविष्य की अनिवार्य तकनीक बताया। उन्होंने कहा कि हर नागरिक तक सेवाओं का पूरा पैकेज पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी और काम है। उन्होंने बताया कि सरकार ने तीन कंपनियों- Starlink, Jio और OneWeb को लाइसेंस जारी किए हैं और नियमानुसार स्पेक्ट्रम आवंटन भी किया गया है।
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