
वेनेजुएला पर अमेरिका के अचानक किए सैन्य कार्रवाई के बाद ग्लोबल मार्केट्स में हलचल की आशंका जताई जा रही थी। आम तौर पर ऐसी खबरें आते ही शेयर बाजारों में घबराहट दिखती है, रिस्क लेने का सेंटीमेंट कमजोर होता है और निवेशक सुरक्षित एसेट्स की ओर भागते हैं। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि भारतीय शेयर बाजारों पर इस घटना का लगभग कोई बड़ा असर नहीं दिखा। सवाल यही है कि जब दुनिया में तनाव बढ़ा, तब भारतीय बाजार इतने शांत क्यों रहे?
सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सोमवार 5 जनवरी को सीमित दायरे में कारोबार करते दिखे। निफ्टी में हल्की बढ़त रही, बैंकिंग और ऑटो शेयरों में 1–2 प्रतिशत की मजबूती दिखी, जबकि टेक शेयरों में मामूली कमजोरी रही। कुल मिलाकर बाजार का रुख यह बता रहा था कि निवेशक वेनेज़ुएला की खबरों को किसी बड़े संकट की तरह नहीं देख रहे, बल्कि इसे सिर्फ एक रिस्क प्रीमियम इवेंट मान रहे हैं। यानी ऐसी घटना जो थोड़ी अनिश्चितता तो बढ़ाती है, लेकिन अर्थव्यवस्था की बुनियाद को नहीं हिलाती।
भारतीय बाजारों के शांत रहने की एक बड़ी वजह क्रूड ऑयल के दाम भी रहे। जब भी मिडिल ईस्ट या किसी बड़े तेल उत्पादक देश से जुड़ा कोई तनाव बढ़ता है, तो सबसे पहले कच्चे तेल की कीमतें उछलती हैं और भारत जैसे क्रूड ऑयल के बड़े खरीदार देश के लिए यही सबसे बड़ा खतरा बन जाता है। लेकिन इस बार ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 61 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ही स्थिर बना रहा। न तो उसमें तेज उछाल आया और न ही कोई सप्लाई शॉक दिखा। यहां तक कि ओपेक+ देशों ने भी मार्च तक क्रूड ऑयल के उत्पादन स्तर को स्थिर बनाए रखने का फैसला किया है, जिससे बाजार को यह संकेत मिला कि फिलहाल सप्लाई साइड पर कोई बड़ा संकट नहीं है।
तेल के शांत रहने का सीधा मतलब यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर तुरंत कोई दबाव नहीं बना। अगर क्रूड ऑयल का भाव अचानक 80–90 डॉलर की ओर भागता, तो फिर शेयर बाजार की प्रतिक्रिया बिल्कुल अलग होती। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, इसलिए शेयर मार्केट्स ने भी राहत की सांस ली।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्लोबल क्रूड ऑयल सप्लाई में वेनेज़ुएला का योगदान केवल 1 प्रतिशत के आसपास है। यानी वह इतना बड़ा खिलाड़ी नहीं है कि अकेले उसकी वजह से ग्लोबल ऑयल मार्केट हिल जाए। इसलिए निवेशकों ने इसे सप्लाई शॉक की बजाय सिर्फ एक जियोपॉलिटिकल रिस्क के तौर पर देखा। बाजारों में ऐसे रिस्क पहले से प्राइस-इन होते हैं और जब तक हालात बहुत ज्यादा बिगड़ते नहीं हैं, तब तक बड़े झटके नहीं दिखते।
ब्रोकरेज और रेटिंग एजेंसियों के मुताबिक, अगर क्रूड ऑयल के दाम लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बने रहते हैं, तो फिर एयरलाइंस, पेंट्स, FMCGs और ट्रांसपोर्ट जैसे सेक्टर्स पर दबाव जरूर बन सकता है, लेकिन अभी वह स्थिति दूर है।
असित सी मेहता इनवेस्टमेंट्स इंटरमीडियरीज के रिसर्च हेड सिद्धार्थ भामरे का कहना है कि ऑयल मार्केट की शांत प्रतिक्रिया ही भारतीय इक्विटी में स्थिरता की वजह है। उनके मुताबिक वेनेजुएला की सप्लाई का असर पहले से ही ग्लोबल मार्केट में सीमित था। इसलिए ब्रेंट क्रू़ड का 60 डॉलर के आसपास रहना निवेशकों के लिए राहत की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक मामला बड़े देशों के सीधे टकराव में नहीं बदलता, तब तक तेल कीमतों में बड़ी और लंबी उछाल की संभावना कम है।
एक और अहम वजह है भारत की तैयारी और ताकत। भारत ने पिछले कुछ सालों में अपने कच्चे तेल के स्रोतों को काफी हद तक डायवर्सिफाई किया है। आज भारत सिर्फ एक या दो देशों पर निर्भर नहीं है। इसके अलावा देश के पास करीब 700 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो किसी भी अचानक झटके को झेलने में मदद करता है।
अब बात करते हैं उन लेवल्स की, जिन पर सच में बाजार डर सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर ब्रेंट क्रूड का भाव लंबे समय तक 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला जाता है, तो भारत का इंपोर्ट बिल तेजी से बढ़ेगा। क्रूड ऑयल के दाम में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत का इंपोर्ट बिल करीब 17 से 18 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है और करंट अकाउंट डेफिसिट भी बढ़ता है। लेकिन फिलहाल तेल इन स्तरों से काफी नीचे है, इसलिए बाजार रिलैक्स है।
कॉरपोरेट एक्सपोजर की बात करें तो भारत की कंपनियों का वेनेज़ुएला से सीधा जुड़ाव भी बहुत सीमित है। कुछ सरकारी तेल कंपनियों और निजी रिफाइनर्स के पुराने रिश्ते जरूर रहे हैं, कुछ फार्मा कंपनियां भी वहां काम करती हैं, लेकिन ये एक्सपोजर इतने बड़े नहीं हैं कि इससे इन कंपनियों के रेवेन्यू में कोई बड़ी गिरावट आए। इसलिए निवेशकों को यहां से भी ज्यादा चिंता नहीं दिखी।
हालांकि एक्सपर्ट्स यह जरूर मानते हैं कि यह घटना एक लॉन्ग-टर्म सिग्नल जरूर देती है। दुनिया धीरे-धीरे ज्यादा बंटी हुई हो रही है। एनर्जी, करेंसी और फाइनेंस को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन शेयर बाजारों के लिए ये बातें तब तक मायने नहीं रखतीं, जब तक उनका सीधा असर कमाई, महंगाई और ग्रोथ पर न दिखे।
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