
म्यूचुअल फंड्स 3 साल में पहली बार भारतीय इक्विटी में नेट सेलर बन गए हैं। उन्होंने फरवरी में अब तक लगभग 4,100 करोड़ रुपये के स्टॉक बेचे हैं। म्यूचुअल फंड्स ने आखिरी बार सेलिंग अप्रैल 2023 में की थी। उस वक्त उन्होंने 4,532 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे थे। MF ने जनवरी 2026 में 42,355 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर खरीदे। उन्होंने 2025 के दौरान भारतीय इक्विटी में लगभग 4.93 लाख करोड़ रुपये लगाए।
DRChoksey FinServ के मैनेजिंग डायरेक्टर देवेन चोकसी का कहना है कि हालिया सेलिंग रिडेंप्शन प्रेशर के बजाय पोर्टफोलियो की रीपोजिशनिंग को दिखाती है। म्यूचुअल फंड्स कुछ अंडरपरफॉर्मिंग स्टॉक्स से बाहर निकल रहे हैं और बेहतर क्वालिटी वाले नामों, खासकर लार्ज-कैप सेगमेंट में कैपिटल को रीएलोकेट कर रहे हैं। अभी रिडेंप्शन प्रेशर का कोई संकेत नहीं है, SIP इनफ्लो जारी है, और यह एक्टिविटी पोर्टफोलियो में बदलाव और प्रॉफिट बुकिंग से जुड़ी हुई लगती है।
आनंद राठी वेल्थ के डिप्टी चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर फिरोज अजीज ने कहा कि बेचने के स्केल को डिसाइडिंग नहीं माना जाना चाहिए। लगभग 40 लाख करोड़ रुपये मैनेज करने वाली इंडस्ट्री में 4,100 करोड़ रुपये की सेलिंग काफी कम है। यह कुछ स्कीम्स या एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के एक्शन को दर्शा सकती है।
इंडेक्स रीबैलेंसिंग से भी हो सकता है नाता
एक्सपर्ट्स ने कहा कि इक्विटी बेचने का संबंध इंडेक्स रीबैलेंसिंग से भी हो सकता है। इसकी वजह है कि 31 जनवरी NSE इंडेक्सेज के लिए रिव्यू डेट है और MSCI ने फरवरी की शुरुआत में बदलाव की घोषणा की थी। द वेल्थ कंपनी में मैनेजिंग पार्टनर और मार्केट स्ट्रैटेजी के हेड अक्षय चिंचालकर ने कहा कि कई फैक्टर फ्लो पर असर डाल सकते हैं। इनमें इंडिया-US ट्रेड डील की बदलती डिटेल्स, खासकर एग्रीकल्चरल गुड्स से जुड़े बदलाव शामिल हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भूराजनीतिक अनिश्चितता और पॉलिसी में और ढील की उम्मीदों के बीच निवेशकों ने गोल्ड और सिल्वर ETF, बॉन्ड फंड्स और हाइब्रिड फंड्स में भी ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है। ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी 500 अपने 52-सप्ताह के हाई से लगभग 3.4 प्रतिशत नीचे है। वहीं इंडेक्स में लगभग 50 प्रतिशत स्टॉक अपने-अपने 52-वीक के हाई से 20 प्रतिशत से ज्यादा नीचे ट्रेड कर रहे हैं।
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