
मार्केट एक्सपर्ट्स को इंडिया की ग्रोथ स्टोरी पर पूरा भरोसा है। उनका मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पॉलिसी की वजह से जियोपॉलिटिकल रिस्क बढ़ने के बावजूद इंडिया का प्रदर्शन बेहतर बना रहेगा। इस पर शॉर्ट टर्म के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ेगा। मार्केट एक्सपर्ट्स ने 9 जनवरी को मुंबई में आयोजित सीएफए सोसायटी इंडिया इनवेस्टमेंट कॉन्फ्रेंस में ये बातें कहीं।
Carenlian Asset Managers के विकास खेमानी ने कहा, “मेरा मानना है कि 2025 के मुकाबले 2026 बेहतर रहेगा। पिछला साल कंसॉलिडेशन का साल था।” उन्होंने कहा कि हर दो साल पर आपको ऐसा साल देखने को मिलता है। रूस-यूक्रेन लड़ाई से पैदा हुई अनिश्चितता का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि स्थितियां सामान्य होने से पहले निराशा चरम पर पहुंच जाती है। उन्होंने कहा तब भी जियोपॉलिटिक्स, ऑयल प्राइसेज और इनफ्लेशन की वजह से निराशा चरम पर थी। लेकिन, सितंबर-अक्तूबर से स्थितियां सामान्य होने लगीं।
उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भी इंडिया की ग्रोथ स्टोरी मजबूत हुई है। उन्होंने कहा, “पिछले 12 महीनों में जब ये चीजें हो रही थीं तब इंडिया की ग्रोथ को सपोर्ट करने वाली कई चीजें सामने आईं। इनमें मॉनेटरी उपाय, लिक्विडिटी इनफ्यूजन, इंटरेस्ट रेट एक्शंस और ग्रोथ को बढ़ावा देने वाली पॉलिसीज शामिल थीं।” उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस कैपिटल एक्सपेंडिचर पर बना हुआ है। प्राइवेट कैपेक्स में भी इम्प्रूवमेंट है।
कई एक्सपर्ट्स ने यह माना कि ट्रंप की पॉलिसीज को देखते हुए मार्केट के बारे में किसी तरह का अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है। एचडीएफसी एएमसी के चिराग सितलवाड़ ने कहा कि हालांकि, लंबी अवधि के लिहाज से रिटर्न स्ट्रॉन्ग बना हुआ है, लेकिन वैल्यूएशन को लेकर अब भी चैलेंज बना हुआ है। उन्होंने कहा कि बीते 3 सालों का रिटर्न अभी भी 20 प्लस है। मिडकैप का बीते 10 सालों का रिटर्न 16-17 फीसदी है। इंडियन मार्केट्स का प्रदर्शन शानदार रहा है। हमने एक साल या डेढ़ साल का कंसॉलिडेशन देखा है।
उन्होंने कहा, “वैल्यूएशंस अभी भी प्रीमियम पर हैं। मिडकैप में यह प्रीमियम 15-20 फीसदी है। स्मॉलकैप में 14-15 फीसदी है। इसके सामान्य स्तर पर आने के लिए करेक्शंस की जरूरत है।” उन्होंने कहा कि रिटेल सेंटीमेंट में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आईपीओ की रफ्तार सुस्त पड़ी है। वैल्यूएशंस को लेकर संवेदनशीलता बढ़ी है। पहले हम बहुत ज्यादा चिंतित थे, अब थोड़ा चिंतित हैं। विदेशी बाजारों के बारे में उन्होंने कहा कि अमेरिका में ग्रोत 2.5-2.7 फीसदी रह सकती है। चीन के साथ स्ट्रक्चरल मसले हैं। यूरोप मझधार में है।
व्हाइटओक कैपिटल के प्रशांत खेमका ने कहा कि शोरगुल के बावजूद इंडियन मार्केट स्टेबल बना हुआ है। उन्होंने कहा कि किसी भी साल की शुरुआत में इंडियन मार्केट्स से 10-12 फीसदी की रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है। 2026 भी इससे अलग नहीं होगा। उन्होंने यह मानने से इनकार कर दिया कि इंडिया की वैल्यूएशंस ज्यादा है। उन्होंने कहा कि इंडिया में हमेशा बाजार का मल्टीपल ज्यादा रहा है। इंडिया ज्यादा मल्टीपल का हकदार है। यहां लोकतंत्र है। प्रॉपर्टी के राइट्स स्ट्रॉन्ग हैं।