भारतीय शेयर बाजार की विदेशी ब्रोकरेज ने घटाई रेटिंग, कहा- 2026 में अब सिर्फ 7.5% रिटर्न की उम्मीद – indian stock market downgraded to neutral by bernstein nifty upside capped at 7 5 percent



Stock Market: भारतीय शेयर बाजार को लेकर ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन (Bernstein) ने सतर्क रुख अपनाते हुए भारत पर अपनी रेटिंग को घटाकर ‘न्यूट्रल’ कर दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि भारतीय शेयर मार्केट 2026 में दुनिया के सबसे महंगे बाजारों में से एक है और मौजूदा स्तरों से निफ्टी में सीमित ही तेजी की गुंजाइश बची है।

बर्नस्टीन के एनालिस्ट वेणुगोपाल गरे के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार इस समय अपने फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) के 20 गुना से अधिक के वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। वहीं बर्नस्टीन की ओर से ट्रैक किए जा रहे दुनिया के 15 प्रमुख शेयर बाजारों का औसत वैल्यूएशन करीब 15.1 गुना है। इस तुलना से साफ है कि भारत की वैल्यूएशन प्रीमियम पर बनी हुई है।

ब्रोकरेज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बाजार एक बार फिर ऐसे दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां वैल्यूएशन काफी ऊंचे स्तर पर हैं। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो ऐसे समय में निवेशकों को ज्यादा महंगे बाजारों के बजाय सस्ते बाजारों में ‘कैच-अप ट्रेड’ का फायदा मिलता है। हालांकि FY24 के बाद का दौर इससे अलग रहा, जब महंगे बाजारों में ही निवेश का प्रवाह जारी रहा और वैल्यूएशन और ऊंची होती चली गई।

बर्नस्टीन का यह भी मानना है कि जिन वर्षों में बाजार को कोई बड़ा ट्रिगर नहीं मिलता, वहां रिटर्न मुख्य रूप से वैल्यूएशन री-रेटिंग और कैच-अप मूवमेंट से आते हैं, न कि तेज अर्निंग ग्रोथ से। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए वैल्यूएशन को लेकर अनुशासन बेहद जरूरी हो जाता है।

कमाई के मोर्चे पर भी तस्वीर बहुत ज्यादा मजबूत नहीं दिख रही। 2025 में अर्निंग ग्रोथ तुलनात्मक रुप से कमजोर रही है। बर्नस्टीन ने कहा कि अगर FY28 तक करीब 13.5% की अर्निंग CAGR मान ली जाए और दो साल आगे की अनुमानित EPS पर 19 गुना का मल्टीपल लगाया जाए, तो इस आधार पर निफ्टी के लिए टारगेट 28,100 का आता है।

मौजूदा स्तरों से यह करीब 7.5% के रिटर्न का अनुमान बैठता है, जो रिस्क के मुकाबले सीमित माना जा रहा है। इसी वजह से बर्नस्टीन ने भारत के लिए अपना आउटलुक ‘पॉजिटिव’ से घटाकर ‘न्यूट्रल’ कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा वैल्यूएशन पर भारतीय बाजार में बड़ा अपसाइड फिलहाल सीमित नजर आता है और निवेशकों को आने वाले समय में स्टॉक सिलेक्शन और वैल्यूएशन डिसिप्लिन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होगी।

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