ईरान-इजरायल जंग से बाजार धड़ाम, SIP जारी रखें या बंद करने में भलाई? जानिए एक्सपर्ट से – should sip investors continue or stop during market crash iran israel war impact on indian stock market



भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी गिरावट आई। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव ने दुनिया भर के बाजारों में डर का माहौल बना दिया, जिसका असर भारत पर भी साफ दिखा। निफ्टी 50 में 300 से ज्यादा अंकों की गिरावट आई। वहीं, सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 1,200 से ज्यादा अंक टूट गया था। यह गिरावट सिर्फ घरेलू वजहों से नहीं, बल्कि वैश्विक बिकवाली का हिस्सा थी।

करोड़ों छोटे निवेशकों के लिए यह हलचल चिंता बढ़ाने वाली है। करीब 9.92 करोड़ भारतीयों के पास एक्टिव SIP खाते हैं। इनमें से कई लोग पहली बार अपने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो को लाल निशान में देख रहे होंगे। ऐसे में SIP रोक देने या कुछ समय के लिए बंद कर देने का मन होना स्वाभाविक है। लेकिन क्या अभी ऐसा करना सही फैसला होगा?

SIP रोकना क्यों पड़ सकता है महंगा

जब बाजार तेजी से गिरता है, तो कुछ न कुछ करने की बेचैनी बढ़ जाती है। लेकिन SIP निवेशकों के लिए यही कदम सबसे नुकसानदेह हो सकता है।

स्टेप ट्रेड कैपिटल की निदेशक और फंड मैनेजर क्रेशा गुप्ता कहती हैं कि SIP एक अनुशासित निवेश तरीका है। इसे लंबे समय के कंपाउंडिंग टूल की तरह देखना चाहिए। ऐसे समय में SIP रोकना या उससे बाहर निकलना इसकी पूरी संरचना को तोड़ देता है। SIP का मकसद ही अनिश्चित दौर में निवेश जारी रखना है, सिर्फ अच्छे बाजार में पैसा लगाना नहीं। यानी जो समय आपको SIP रोकने के लिए सही लग रहा है, वही समय SIP के लिए सबसे अहम होता है।

फॉर्चुना एसेट मैनेजर्स के पार्टनर आशीष आनंद भी यही कहते हैं। उनके मुताबिक, बाजार में गिरावट इक्विटी निवेश का सामान्य हिस्सा है। जब बाजार गिरता है, तो SIP के जरिए निवेशक कम कीमत पर ज्यादा यूनिट खरीद पाते हैं। छोटी अवधि के अंतरराष्ट्रीय तनावों से घबराने के बजाय अपने लंबे समय के टारगेट पर ध्यान रखना चाहिए।

गिरावट स्थायी नहीं होती

क्रेशा गुप्ता बताती हैं कि भू राजनीतिक तनाव के दौरान भारतीय बाजारों में आम तौर पर 5 से 10 प्रतिशत तक गिरावट देखी जाती है। लेकिन इतिहास बताता है कि 3 से 6 महीने में रिकवरी भी हो जाती है। ऐसे समय में SIP रोक देने से आप नुकसान से नहीं बचते, बल्कि उछाल का मौका गंवा देते हैं।

ट्रुनोर एंटरप्राइजेज के CFP लेफ्टिनेंट कर्नल रोचक बक्शी का कहना है कि भू राजनीतिक झटकों से आई छोटी अवधि की अस्थिरता आपके लंबे समय के SIP प्लान को प्रभावित नहीं करनी चाहिए। जो निवेशक अनिश्चितता के दौर में भी नियमित निवेश जारी रखते हैं, वे अक्सर कम औसत लागत और बेहतर लंबे समय का रिटर्न हासिल करते हैं।

कम औसत लागत का यही फायदा ‘रुपया लागत औसत’ यानी Rupee Cost Averaging कहलाता है, जो गिरावट के समय SIP को और मजबूत बनाता है।

रुपया लागत औसत कैसे काम करता है

इसे आसान उदाहरण से समझें। मान लीजिए आप हर महीने 10,000 रुपये SIP में निवेश करते हैं। अगर किसी महीने फंड का NAV 100 रुपये है, तो आपको 100 यूनिट मिलेंगी।

अब अगर बाजार 20 प्रतिशत गिर जाए और NAV घटकर 80 रुपये हो जाए, तो वही 10,000 रुपये आपको 125 यूनिट दिलाएंगे। यानी बिना अतिरिक्त पैसा लगाए 25 यूनिट ज्यादा मिलेंगी।

उतार-चढ़ाव का SIP से सही फायदा

स्टॉकटिक कैपिटल के फाउंडर और CWM विजय माहेश्वरी बताते हैं कि SIP अस्थिरता से मैकेनिकल फायदा उठाती है। अगर 10,000 रुपये की मासिक SIP 12 महीने चलती है और एक महीने में NAV 20 प्रतिशत गिर जाता है, तो कुल मिलाकर करीब 1,225 यूनिट जमा हो सकती हैं। जबकि अगर बाजार पूरे समय सपाट रहता, तो लगभग 1,200 यूनिट ही मिलतीं।

यह अंतर छोटा लगता है, लेकिन कई सालों में यही अतिरिक्त यूनिट आपके कुल रिटर्न को मजबूत बना सकती हैं। सबसे अहम बात यह है कि जब आप गिरावट के समय SIP रोक देते हैं, तो आप सस्ते भाव पर ज्यादा यूनिट खरीदने का मौका खो देते हैं। नुकसान को औसत करने के बजाय आप उसे वहीं रोक देते हैं।

2008 और 2020 से सबक

2008 के वैश्विक वित्तीय संकट और 2020 के कोविड क्रैश के दौरान बाजार 30 से 40 प्रतिशत तक गिरे थे। उस समय भी डर का माहौल था। लेकिन जिन निवेशकों ने SIP जारी रखी, उनके पोर्टफोलियो ने बाद के महीनों और वर्षों में अच्छी रिकवरी की और बेहतर रिटर्न दिया। जिन्होंने घबराकर निवेश रोक दिया या बाहर निकल गए, उन्होंने नुकसान पक्का कर लिया और बाद की तेजी से चूक गए।

अभी निवेशकों को क्या करना चाहिए

निवेश जारी रखना मतलब आंख बंद कर बैठ जाना नहीं है। विजय माहेश्वरी सलाह देते हैं कि अपनी निवेश अवधि और जोखिम लेने की क्षमता की समीक्षा करें। 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड अलग रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर बाजार के खराब समय में निवेश बेचने की मजबूरी न आए। अगर अतिरिक्त नकदी है, तो इस गिरावट का इस्तेमाल चुनिंदा तरीके से निवेश बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।

क्रेशा गुप्ता साफ कहती हैं कि बाजार गिरने पर SIP रोक देना उसके लंबे समय के रिटर्न की क्षमता को नुकसान पहुंचाता है। गणित, इतिहास और एक्सपर्ट तीनों की राय यही कहती है कि घबराने के बजाय अनुशासन बनाए रखना ज्यादा समझदारी है।

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